पदानुसारी ऋद्वि!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदानुसारी ऋद्वि : A type of supernatural power (related to Predestination of knowledge) एक ऋद्वि इससे आगम का एक पद सुनकर पूर्ण आगम का बोध हो जाता है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदानुसारी ऋद्वि : A type of supernatural power (related to Predestination of knowledge) एक ऋद्वि इससे आगम का एक पद सुनकर पूर्ण आगम का बोध हो जाता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैस्रसिक शब्द – VAisrasika Sabda. Natural sounds (reg. thundering etc.). अभाषात्मक के दो भेदों में एक भेद, मेघ आदि के निमित्त से जो शब्द उत्पन्न होते हैं वे वैस्रसिक शब्द हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुरेन्द्रकीति – Surendrakaanta. Name of the 21st city in the north of Vijayardha mountain. नंदिसंघ बलात्कारगण चित्तौड गद्दी के एक भट्टारक नरेन्द्रकीर्ति के षिष्य । समय – वि0 सं0 1722 ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरंतर – Nirantara. Continuous, constant. नित्य, लगातार होने वाला, सतत, अविच्छिन्न, सदा बना रहने वाला “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथाख्यात चारित्र–Yathakhyata Charitra. Perfect Conduct. वीतराग भाव, कषायोकेसवर्था अभाव से प्रादुर्भूत आत्मा की शुधि विशेष को यथाख्यात चारित्र कहते है” यह 11वे, 12वे, गुणस्थान में होता है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पार्श्वकृष्टि – Parsvakrsti. A type of Krishtics (gradual destruction of passions). पहले समय में की गई कृष्टि के समान ही अनुभाग लिये जो नवीन कृष्टि द्वितीयादि समयों में की जाती है, पूर्व कृष्टि के पार्श्व में ही उनका स्थान होने से वह पार्श्व कृष्टि कहलाती हैं “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पणय: Fungus, Mould. काई या कांजी आदि के ऊपर लगी हुई फफुदी पणय है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैस्रसिकी क्रिया –Vaisrasiki Kriya. Natural activities or changes i.e. cloud thundering etc. मेघ आदि की स्वाभविक क्रिया वैस्रसिकी क्रिया हैं “