उद्यापन!
उद्यापन Vow completing ceremony. किसी व्रत के पूर्ण होने के पश्चात दानादि के साथ किया जाने वाला अनुष्ठान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उद्यापन Vow completing ceremony. किसी व्रत के पूर्ण होने के पश्चात दानादि के साथ किया जाने वाला अनुष्ठान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वार्थाधिगम – Svaarthaadhigama. Self knowledgeable approach. अधिगम के दो भेदो मे एक भेद, यह ज्ञान स्वरुप है जो प्रमाण और नय भेदो वाला है।
त्रसदशक Ten types of particular Karmic nature (related to mobile beings-Trasa). त्रस , बादर, , पर्याप्त , प्रत्येक, स्थिर, शुभ, सुभग, सुस्वर, आदेय, यशः कीर्ति कर्म प्रकृतियाँ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वाद्य – Svadya. Worth tasting, appetizing. आहार के 4 भेदो मे एक भेद। मुख का स्वाद बदलने के लिए खाने वाले लौग, इलायची आदि पदार्थ स्वाद्य कहलाते है।
त्रैलोक्य दीपक A book written by Vamdeva. वामदेव (ई. 13-14) द्वारा रचित एक ग्रंथ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांसारिक दुःख – Saansaarika Duhkha. Worldly affictions or troubles. लौकिक विषयों से उत्पन्न दुःख अर्थात् भोगसाधनात्मक भोगो का वियोग होने से जो दुःख उत्पन्न होता है। संसारी जीवों का इन्द्रिय सुख वासना जनित होने के कारण होने के कारण दुःखमय ही है क्योंकि आपत्त्किाल मे भोग व रोग चित्त मे उद्वेग करने वाले है।
त्रिषष्ठि शलाका पुरूष Sixty three great personages (who attain salvation through any birth). 24 तीर्थंकर + 12 चक्रवर्ती +9 नारायण +9 प्रतिनारायण +9 बलभद्र ये 63 महापुरूष 63 शलाकापुरूष कहलाते है। प्रथमानुयोग के ग्रंथों में इनका वर्णन पाया जाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहायक कारण – Sahaayaka Kaarana. A helping cause. एक कारण । जो स्वयं कार्यरूप परिणाम वह उपादान कारण है तथा उसमें सहयक होने वाले पर द्रव्य व गुण निमित्त सहायक कारण है। इसे बलाधान या उदासीन निमित्त भी कहते है।
दिगम्बर आम्नाय A sect of Jaina. जैनों में वह भेद (मत) जो साधु एक भगवान को निग्र्रंथ वस्त्रादि रहित दिगम्बर मानते हैं। वर्तमान में जैन धर्म में दो आम्नाय चली आ रही न दिगम्बर आम्नाय है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पौराणिक राजवंश – Pauranika Rajavansha. Ancient dynasties like lkshvaku, Ugra, Kuru etc. इक्ष्वाकु वंश, उग्र्वंश, सुर्यवंश, कुंरुवंश, नाथवंश इत्यादि समस्त पौराणिक वंश कहलाते हैं “