ऋष्यमूक!
ऋष्यमूक Name of a mountain of Bharat Kshetra (a region). भरत क्षेत्र का एक पर्वत।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ऋष्यमूक Name of a mountain of Bharat Kshetra (a region). भरत क्षेत्र का एक पर्वत।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मचर्य प्रतिमा – Brahmacarya.Pratima. Seventh model stage of celibacy of Jaina lay- follower. श्रावक की सातवीं प्रतिमा; इसमें श्रावक स्त्रीमात्र का त्याग होकर पूर्ण ब्रह्मचर्य से रहता है ” इसका धारक श्रावक अपने पुत्र – पुत्रियों के विवाह के अतिरिक्त अन्य किसी के विवाह की अनुमोदना नहीं करता है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] हेतु – Hetu. Cause, purpose, intention. जो साध्य के साथ अविनाभाविपने से निष्चित हो अर्थात् साध्य के बिना न रहे उसको हेतु कहते है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमात्मा:Supreme soul, Loard Arihant & Siddha.उत्कृष्ट आत्मा, अद्वैत एवं सिद्व भगवान ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सूक्ष्म कषाय : == कौसुम्भ: यथा राग:, अभ्यन्तरत: च सूक्ष्मरक्त: च। एवं सूक्ष्मसराग:, सूक्ष्मकषाय इति ज्ञातव्य:।। —समणसुत्त : ५५९ कुसुम्भ के हल्के रंग की तरह जिनके अन्तरंग में केवल सूक्ष्म राग शेष रह गया है, उन मुनियों को सूक्ष्म—सराग या सूक्ष्म—कषाय जानना चाहिए।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हिरण्योत्कृष्ट जन्मता – Hiranyotkrsta Janmataa. An auspicious activity (gold rain, pertaining to the birth of Tirthankar Jaina Lord). गर्भन्वयी 53 क्रियाओ मे 39 वीं किं्रया-तीर्थकरो के जन्म संबंधी उत्कृष्टता की सूचक अन्य बातो के साथ साथ स्वर्ण ही वर्षा होना।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सत्य : == अकिंहतस्स वि जह गहवइणो जगविस्सुदो तेजो। —भगवती आराधना : ३६१ अपने तेज का बखान नहीं करते हुए भी सूर्य का तेज स्वत: जगविश्रुत है। सच्चं जसस्स मूलं, सच्चं विस्सासकारणं परमं। सच्चं सग्गद्दारं सच्चं, सिद्धीइ सोपाणं।। —धर्मसंग्रह टीका : २-२६ सत्य यश का मूल कारण है।…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हिंसक – Himmsaka. Violent or dangerous one. जो जीव क्रोध आदि कषाय सहित अर्थात् प्रमाद सहित है।