सूक्ष्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म – Sukshma. Micro particles or organism (invisible). जे इन्द्रियो के गोचर न हो ऐसे स्कंध जैसे कार्मण वर्गंणाआदि , एकेन्द्रिय जीवों के सूक्ष्म और बादर इन दो भेदों में प्रथम भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म – Sukshma. Micro particles or organism (invisible). जे इन्द्रियो के गोचर न हो ऐसे स्कंध जैसे कार्मण वर्गंणाआदि , एकेन्द्रिय जीवों के सूक्ष्म और बादर इन दो भेदों में प्रथम भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिंगल – Pingala. One of the 9 treasures of Chakravarti (emperor), A king of Yadu dynasty. चक्रवर्ती की नव निधियों में दिव्याभरण उत्पन्न करने वाली एक निधि, यदु (यादव) वंश का एक राजा “
दोलायित An infraction of meditative relaxation (mental & bodily fluctuation). कायोत्सर्ग का एक अतिचार; हिंडोले दउकी भांति शरीर का अथवा मन का डोलना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुशील – Susheela. Of good character or disposition, amiable, modest, courteous. नैतिक या धार्मिक गुण अथवा अच्छे शील (चरित्र) वाला ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाल्यकीर्ति – Palyakirti. Name of an Acharya who wrote a book ‘Shabdanushasan’. शब्दानुशासन ग्रंथ के रचयिता एक आचार्य “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == विद्या : == सम्यगाराधिता विद्यादेवता कामदायिनी। —आदिपुराण : १६-९९ विद्या देवता की सम्यग्—सही विधि से आराधना करने पर वह समस्त इच्छित फल प्रदान करती है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्गण संवर्गण – Vargana Sanvargana.: A type of particular mutual multiplication (a mathematical operation). गणित ;देय –विरलन संख्याओं को परस्पर गुणा करने से प्राप्त राशि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पार्श्वनाथ विधान – Parsvanatha Vidhana. A worshipping book written by Ganini Gyanmati Mataji. पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी द्वरा रचित १०८ अर्ध्यों से समन्वित एक पूजा ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वयोपेक्षा विवर्जन – Vayopekshaa Vivarjana: Disruption of meditative relaxation due to old age (a fault ). व्युत्सर्ग का एक दोष ;वृद्धावस्था के कारण कायोत्सर्ग को छोड़ देना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यग्रोधपरिमंडलसंस्थान नामकर्म – Nyagrodhaparimandalasanathan Naamkarma. Karmic nature causing partly asymmetrical configuration of body. जिस कर्म के उदय से जीव का शरीर बड़ के पेड़ के समान नाभि के ऊपर मोटा और नीचे पतला होता है “