द्रव्य संसार!
द्रव्य संसार Physical world. जिसमें जीव पुद्गल परमाणुओं को अनंत बार शरीर और कर्मरूप से ग्रहण तथा विसर्जन करता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य संसार Physical world. जिसमें जीव पुद्गल परमाणुओं को अनंत बार शरीर और कर्मरूप से ग्रहण तथा विसर्जन करता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीरत्रिक – Sahreeratrika. A triplet related to body. औदारिक, वैक्रियिक, आहारक शरीर “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाववती शक्ति – Bhavavati Sakti. Volitional strength of something. द्रव्य की एक शक्ति; प्रदेशत्व गुणों के अतिरिक्त शेष गुणों के परिणाम की भाव रूप शक्ति “
द्रव्य लिंग Physical sign or appearance (related to a saint). बाहरी भेष, साधु का बाहरी चिन्ह, परिग्रह रहित व पिच्छी कमण्डलु सहित होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य पाप Sinful nature of Karmas (substantive sin). कर्म की पाप रूप 100 प्रकृतियां ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य ध्येय To concentrate mind on the virtuous matters. अध्यात्म वेत्ताओं के अनुसार 4 प्रकार के ध्येय पदार्थों में एक सत् या गुणपर्यायवान् पदार्थ में एकाग्र होना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य अप्रत्याख्यान Lust or desire for illusive matters. रागादि विषयों की आकांक्षा रूप अप्रत्याख्यान के दो भेदों में एक भेद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्यानतराय A writer who wrote number of books on Jainism. टागरा निवासी एक लेखक ‘पंडित’ जिन्होंने धर्मविलास, पूजापाठ व भक्ति स्तोत्र आदि अनेक ग्रंथों की रचना की। समय- ई. सन् 1676-1723।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सामान्यतो द्रष्ट – Saamaanyato Drashta. General anticipation or apprehension for something. स्वार्थानुमान के तीन भेदों में एक भेद । जो सामान्य रूप से लिंग को देखकर लिंगी का अनुमान किया जाता है वह सामान्यतो दृष्ट है।