संसार विचय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसार विचय – Sansaara Vichaya. Contemplation about the transformable nature of the matter, region, time, realm of the life and emotions. द्रव्य, क्षेत्र, काल, भव एवं भावरूप पंचपरावर्तन के स्वरुप का चिंतन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसार विचय – Sansaara Vichaya. Contemplation about the transformable nature of the matter, region, time, realm of the life and emotions. द्रव्य, क्षेत्र, काल, भव एवं भावरूप पंचपरावर्तन के स्वरुप का चिंतन करना “
घोर पराक्रम A type of supernatural power of having omnipotent like power of making dry to the water of an ocean etc. जिस ऋद्धि के प्रभाव से साधु अनुपम तप करते हुए तीन लोक के संघारी की शक्ति से संपन्न और सहसा समुद्र के जल सुखा देने की सामर्थ्य से युक्त होते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सभाभवन – Sabhaabhavana. Assembly hall, Auditorium. कक्ष जिसमे सभा आयोजित की जाती है, व्यंतर आदि देवो के चैत्यालयो मे सभा मण्डप।
गोचरी वृत्ति Procedure of food taking of Jaina saints. जैनसाधु की आहारचर्या को गोचरी वृत्ति कहते हैं क्क्योंकी गाय की भाँती वह दतार के प्रति निस्पृह रहते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उदासीन Passive, Indifferent, Neutral. तटस्थ निःस्पृह तत्ववेत्ता जगत के समस्त तत्वों में मैं और मेरेपन का संकल्प न होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
घाट Name of the 5th Indrak or Patal (layer) of Sharkara Prabha earth, Bank of a river. शर्कराप्रबाह पृथिवी के ५वें इन्द्रक का पटल का नाम , नदी का किनारा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिसारी ऋद्धि- pratisari Rddhi A type of super natural power (reg. cognition of knowledge) ऋद्धि; जिसके प्रभाव से गुरु के उपदेष से आदि, मध्य अथवा अन्त में एक बीजपद को ग्रहण करके अधस्तन ग्रन्थ को जानना।
उदीरक Who is involved in fruitional operations of Karmas. उदीरणा करने वाला ज्ञानावरणीय दर्शनावरणीय और अंतराय इन तीन कर्मोंकी उदीरणा करने वाले (मिथ्यादृष्टि से लेकर क्षीण कषाय पर्यंत) जीव उदीरक कहलाते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गुप्तसंघ Name of a saint group (traditional). मूलसंघ के विघटन के पश्चात् अनेक अवांतर संघों में से एक संघ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सप्त भय – Sapta Bhaya. Seven particular kinds of fear. इह लोक भय, परलोक भय, वेदना भय, मरण भय, अरक्षा भय, अगुप्ति भय, अकस्मात् भय। ये सात भय है जो सम्यग्दृष्टि को नही होते है।