धनंजय!
धनंजय A Digambar Jain poet. दिगम्बर आम्नाय के एक कवि (धनंजय नाममाला, विषापहार स्त्रोत आदि के कर्ता) ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धनंजय A Digambar Jain poet. दिगम्बर आम्नाय के एक कवि (धनंजय नाममाला, विषापहार स्त्रोत आदि के कर्ता) ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठा पाठ- आचार्य इन्द्रनन्दि (ई.श. 10 मध्य), आचार्य वसुनन्दि (ई. 1068-1118) एवं पं. आषाधर (ई. 1173-1243) द्वारा रचित प्रश्ठिा पाठ संबंधी ग्रन्थ। pratistha patha – name of ritual treatise written by acharyas (1) indranandi (2) vasunandi and pandit ashadhar.
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भट्टारक – Bhattaraka. The super souls, A title for super soul & spiri-tual personalities according to ancient Jaina scriptures. धवला आदि प्राचीन ग्रन्थों में अर्हन्त, सिध्द, साधु को परमपूज्यता के प्रतीक में भट्टरक शब्द से संबोधित किया गया है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रघुम्न – कृश्ण के पुत्र का नाम जो गिरनार पर्वत से मोक्ष पधारे। pradyumna – son of lord krishna (who got salvation from girnar mountain
द्वेषकी क्रिया A kind of activity of violence . एक प्रकार की हिंसा क्रिया।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवचन वात्सल्य- 16 कारण भावना की एक भावना; साधमींजनो को देखकर स्नेह से ओतप्रोत हो जाना। PravacanaVatsalya- Affection towards co-religionists, to keep love with one another
द्विपृष्ठ The second Narayana of the present era. वर्तमान भव में द्वितीय नारायण, जिसने कोटिशिला को अपने मस्तक तक ऊपर उठा लिया था।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदक्षिणा पथ- परिक्रमा करने की वीथी या गली। pradaksina patha – circumambulatory passage
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमेयत्व- प्रमेय के भाव को प्रमेयत्व कहते है। Prameyatva- Something related to the knowledge of subject matter
उदयादित्य Name of a king and a Kannad poet. भोजवंशी राजा जयसिंह के पुत्र (नरवर्मा के पिता मालवा देश के राजा-ई. 1058-1093) उदयादित्यालंकार के रचयिता एक कन्नड कवि (ई. 1150)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]