सद्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सद्म – Sadma. House, palace, home. भवन, मकान।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विदिशा – Vidisha. Subdirections, quarter parts of the four direc- tions. चारों दिशाओं के अतिरिक्त प्रत्येक दो दिशाओं के मध्य स्थित दिशाएँ – ईशान, आग्रेय, नैऋत्य, वायव्य, ये ४ विदिशाएं कहलाती हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध भाव – Shuddha Bhaava . See – Shuddha Parinaama. देखे – शुद्ध परिणाम “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंगराज:A Kannad poet who wrote a book ‘Khagendramanidarpan’. खगेन्द्रमणिदर्पण (चिकित्साशास्त्र) के रचियता एक कन्नड़ कवि “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पूर्वापर विरोध – Purvapara Virodha. State of mutual contradiction. पूर्व और उत्तर समय अर्थात् परस्पर में विरोध होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विज्ञप्ति – Vigyapti.: Announcement, Communique, Synonym for ‘Avay Matigyan’, a sensory knowledge. सूचना , अवाय मतिज्ञान का पर्यायवाची नाम “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा मुक्ति Salvation after one or two births.एक दो आदि भवों के अनंतर मुक्ति होना ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभ्य – Vibhya. An infraction of paying reverence (reverence due to influence of Acharya etc.). वंदना का एक अतिचार, आचार्य आदि के भय से वंदना करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विकस- Vikasa.: One of the 88 planets (71th). ज्योतिष के 88 ग्रहों में 71 वां ग्रह “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मोक्ष—मार्ग : == दर्शनज्ञानचारित्राणि, मोक्षमार्ग इति सेवितव्यानि। साधुभिरिदं भणितं, तैस्तु बन्धो वा मोक्षो वा।। —समणसुत्त : १९३ जिनेन्द्र देव ने कहा है कि (सम्यक्) दर्शन, ज्ञान, चारित्र मोक्ष का मार्ग है। साधुओं को इनका आचरण करना चाहिए। यदि वे स्वाश्रित होते हैं तो इनसे मोक्ष होता है और…