त्रिभंगीसार!
त्रिभंगीसार Name of a commentary book. विभिन्न आचार्यों द्वारा रचित आस्रव बन्ध सत्व आदि नाम वाली 6 त्रिभंगियों का संग्रह। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिभंगीसार Name of a commentary book. विभिन्न आचार्यों द्वारा रचित आस्रव बन्ध सत्व आदि नाम वाली 6 त्रिभंगियों का संग्रह। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
उपरिम कृष्टि See – Uparitana Kro ¼²i . देखें-उपरितन कृष्टि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुवर्णवती – Suvarnavatee. Name of a river of Bharat Kshetra (region) भरत क्षेत्र की एक नदी ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरर्थक – Nirarthaka. Useleess, Meaningless. अर्थहीन, जिसका कोई अर्थ नहीं है “
उपयोग आत्मा Soul with right knowledge . स्व-पर को ग्रहण करने में लिप्त जीव एंव उसके परिणाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुरेन्द्रकीति – Surendrakaanta. Name of the 21st city in the north of Vijayardha mountain. नंदिसंघ बलात्कारगण चित्तौड गद्दी के एक भट्टारक नरेन्द्रकीर्ति के षिष्य । समय – वि0 सं0 1722 ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरंतर – Nirantara. Continuous, constant. नित्य, लगातार होने वाला, सतत, अविच्छिन्न, सदा बना रहने वाला “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पार्श्वकृष्टि – Parsvakrsti. A type of Krishtics (gradual destruction of passions). पहले समय में की गई कृष्टि के समान ही अनुभाग लिये जो नवीन कृष्टि द्वितीयादि समयों में की जाती है, पूर्व कृष्टि के पार्श्व में ही उनका स्थान होने से वह पार्श्व कृष्टि कहलाती हैं “