पदसाहित्य!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदसाहित्य: Name of aphilosopical book. ई0 सन 1724.32 में अध्यात्म पद विषयक रचित एक ग्रंथ ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदसाहित्य: Name of aphilosopical book. ई0 सन 1724.32 में अध्यात्म पद विषयक रचित एक ग्रंथ ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशेष गुण – Vishesha. Guna. Special characteristics recognizable properties of matter. जिस गुण से द्रव्यों में भेद जाना जाता है अर्थात् विशेष गुणों के द्वारा द्रव्य विशेष सिद्ध किया है ” सर्वद्रव्यों में विशेष गुण १६ हैं “
घ The fourth consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का चतुर्थ व्यंजन , इसका उच्चारण-स्थान कण्ठ है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सप्तभंगी तरंगिणी – Saptabhamgii Taramginii. Name of a treatise written by Vimaldas on Nyaya philosophy. विमलदास (श्रावक) (ई.श. 14-15) कृत संस्कृत भाषा का न्याय विषयक ग्रंथ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पत्रचार ऋद्वि:A type of supermatural power of unviolennceful passing through leves (related to Jaina saints). दिगम्बर जैन मुनियों को प्राप्त होने वाली एक ऋद्वि जिसके प्रभाव से पत्तों आदि में रहने वाले जीवों की विराध्ना न करके उनके ऊपर से मुनिगण जा सकते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मैनासुंदरी–Mainasundri. Name of a great pious lady in the Jain history. राजा पहुपाल की पुत्री, जिसे क्रोध के वश पिता ने श्रीपाल कुष्टी के साथ विवाह दी” गंधोदक द्वारा पति का कुष्ट दूर किया आयर अन्त में दीक्षा ली”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्धोदन – Shuddhodana. The father of Mahatma Buddha. महात्मा बुद्ध के पिता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सपर्या – Sparyaa. Ritual activity. योग, यज्ञ, पूजा, सपर्या, इज्जा, क्रतु, अध्वर, मख, मह यह सब पूजा के पर्यायवाची नाम है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पट्टन:City, town (48000 cities of Chakravarti are one of his grandeurs) नगर, चक्रवर्ती का 36 वाॅं वैभव – 48000 पत्तन ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथाच्छंद मुनि–Yathachchhand Muni. Unrestrained or self–willed saints. स्वछंद प्रवृत्ति करने वाला साधु; जिन आगम विरुद्ध, इन्द्रिय व कषाय के वशीभूत”