आधोवधिक!
आधोवधिक A variety of clairvoyance (Avadhigyan). अवधिज्ञान का एक प्रकार।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आधोवधिक A variety of clairvoyance (Avadhigyan). अवधिज्ञान का एक प्रकार।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संसार : == धिक् संसारं यत्र, युवा परमरूपर्गिवतक:। मृत्वा जायते, कृमिस्तत्रैव कलेवरे निजके।। —समणसुत्त : ५११ इस संसार को धिक्कार है, जहाँ परम रूप-र्गिवत युवक मृत्यु के बाद अपने उसी त्यक्त मृत शरीर में कृमि के रूप में उत्पन्न हो जाता है। न नास्तीहावकाशो, लोके बालाग्रकोटिमात्रोऽपि। जन्ममरणबाधा, अनेकशो…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरिवंश पुराण – Harivammsa Puraana. Name of a great mythological treatise written by Acharya Jinsen. आचार्य जिनसेन (ई. 783) कृत 66 सर्ग तथा 10,000 श्लोक प्रमाण ग्रंथ।
तत्वज्ञान The knowledge of truth or reality of any matter. तत्वों को जानकर आत्मा का विशेष बोध या मनन करना । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योशिता – स्त्री, चक्रवर्ती के 14 रत्नो में एक रत्न। Yosita-A women one of the 14th Jewels of Chakravarti
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरिचन्द्र – Haricandra. Name of the 4th predestined Balbhadra. आगामी चैथे बलभद्र।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यावानुद्देष – औद्देषिक आहार के 4 भेदो में एक भेद। Yavanuddesa-Food prepared with the intention of distributing to everyone
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हनुमंत चारित्र – Hanumammta Caarita. Name of a book written by Pandit Raimalla. पं रायमल्ल (ई. 1575-1593) कृत भाषा ग्रंथ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पर प्रत्यय उत्पाद:See- Para Nimittaka Utpada.देखे निमित्तक उत्पाद ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति सांन्तर – Prakrti Santara. Karmic nature with momentary binding. जिन कर्म प्रकृतियों का एक समय बंध होकर द्वितीय समय में जिनका बंध विश्रांत हो जाता है वे सांतर बंधी प्रकृतियां कहलाती हैं “