गौरीकूट!
गौरीकूट A city of Vidyadhars. विद्याधारों की एक नगरी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चक्षु इन्द्रिय Visual sense organ, sense of sight, ocular sense. आँखें, जिसके द्वारा संसारी जीव पदार्थों को देखता है उसे चक्षु इन्द्रिय कहते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गर्भकल्याणक An auspicious event (celebration of state of conception of Tirthankar – Jaina Lord). भगवान के पांच कल्याणकों में एक अर्थात् भगवान् का गर्भ में आना. इस समय भगवान की माता १६ स्वप्न देखती हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रिलोकसार A book of Karnanuyog written by Acharya Nemichandra Siddhant Chakravarti. आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्त चक्रवर्ती द्वारा ई.श.11 पूर्व में रचित करणानुयोग से संबंधित लोकविभाग विषय पर प्राकृत ग्रंथ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गार्हपत्य A sacred fire. अग्निकुमार देव के मुकुट से उत्पन्न हुई तीन प्रकार की अग्नियों में से एक अग्नि, जो तीर्थंकर के निर्वाणोत्सव में तीर्थंकर के शरीर का संस्कार करके पूजा का अंग होकर पवित्र मानी जाती है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्वभाव प्रज्ञापन नय – Poorvabhaava Pragyaapana Naya. See – Poorva Pragyaapana Naya. देखें – पूर्व प्रज्ञापन नय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूप्य – रूक्मि पर्वत छठे कूट व देव का नाम। Rupya-name of the 6th summit of rukmi mountain and its deity
गणिनी Chief in Aryikas (Digambar Jain female ascetics). There are 24 Ganinis (Chief Aryikas) in all 24 holy assemblies of Tirthankars (Jaina Lords). जैनाचार्यों के सामान ही आर्यिका का एक प्रमुख पद जो शिष्याओं को शिक्षा-दीक्षा देकर आर्यिका संघ का संचालन करती हैं। मुनियों के सामान आर्यिकाओं के भी २८ मूलगुण होते हैं और वे…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्वरतानुस्मरणत्याग – Poorvataanusmaranatyaaga. Giving up of rememberings of the former sensual pleasures. पूर्व में भोगे हुए इन्द्रिय सुखों के स्मरण का त्याग करना “
खोह The hollowness of a tree, A cave. वृक्ष का कोटर ;साधुओं के निवास या ध्यान योग्य स्थान । [[श्रेणी:शब्दकोष]]