द्वूयंग नमस्कार!
द्वूयंग नमस्कार Greeting, to pay reverence with folding and bending hands. दोनों हाथों को जोड़कर नमस्कार करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वूयंग नमस्कार Greeting, to pay reverence with folding and bending hands. दोनों हाथों को जोड़कर नमस्कार करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैताढय –Vaitadhya Another name of Vijayardhmountain, Range of some particular mountains in the middle of HaimvatKshetra (region) etc. विजयार्ध पर्वत का अपरनाम, हेमवत आदि अन्य क्षेत्रो के मध्य शब्दवान आदि कुटाकार पर्वत भी वैताढय कहलाते है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वयंशोधक – Svayammsodhaka. One who repents himself for his faults, not before the preceptor (it is an infraction). प्रायष्चित देने से पूर्व ही स्वंय प्रायष्चित लेने वाला स्वंय शोधक कहलाता है (यह एक अतिचार है)।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संतति – Santati. Continued succession, offspring, descendants, lineage. परम्परा “
द्रव्य संसार Physical world. जिसमें जीव पुद्गल परमाणुओं को अनंत बार शरीर और कर्मरूप से ग्रहण तथा विसर्जन करता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == चाह : == ख्याति—पूजा—लाभं, सत्कारादि किमिच्छसि योगिन्। इच्छसि यदि परलोकम्, तै िंक तव परलोके ? —समणसुत्त : २३५ हे योगी ! यदि तू परलोक चाहता है तो ख्याति, लाभ, पूजा और सत्कार आदि क्यों चाहता है ? क्या इनसे तुझे परलोक का सुख मिलेगा ?
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभाव गुणपर्याय – Svabhaava Gunaparyaaya. Different natural forms of a matter. द्रव्यो के अगुरुंलधु गुण के अनंत अविभाग प्रतिच्छेदो की समय समय मे उत्पन्न होने वाली जो पर्याये है वह द्रव्यो की स्वभाव गुणपर्याय कही गयी है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाववती शक्ति – Bhavavati Sakti. Volitional strength of something. द्रव्य की एक शक्ति; प्रदेशत्व गुणों के अतिरिक्त शेष गुणों के परिणाम की भाव रूप शक्ति “
आनंदिनी The name of a dominion ‘Bheri’ of Bharat Chakravarti (emperor). भरत चक्रवर्ती की विभूति भेरी का नाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]