संसरण!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसरण – Sansarana. Movement, Worldly wandering, birth & death cycle of beings. गमन, संसार में जन्म मरण करने का नाम संसरण है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संसरण – Sansarana. Movement, Worldly wandering, birth & death cycle of beings. गमन, संसार में जन्म मरण करने का नाम संसरण है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव स्थिति – Bhava Sthiti. Constant nature. जिसका जो स्वभाव है उससे च्युत न होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पात्री :Name of an auspicious article kept near the idol of Lord Arihant.जिन प्रतिमा के पास विद्यमान रहने वाले 108 उपकरणो मे से एक।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संवृति सत्य – Sanvrti Satya. A type of true speech, denoting one prominent among many objects. सत्य वचन के 10 भेदों में एक भेद ” समुदाय को एक देश की मुख्यता से एक रूप कहना ” जैसे-जहां अनेक वाद्यों का शब्द एक समूह में हो रहा है वहां भेरी आदि की मुख्यता से भेरी…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाणितः पिंडपतन:An obstacle pertaining to saint food.आहार अंतराय का एक प्रकार।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मन – Mana. Mind , Consciousness. अन्तःकरण ” नोइन्द्रिय; जिसके द्वारा शिक्षा ग्रहण हो , तर्क – वितर्क हो , संकेत समझा जावे “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विराट – Virata. Name of a country, the old name of Barar. एक देश, राजा विराट यहाँ के राजा थे वनवासी पांडवों ने छध्वेश में इसी का आश्रय लिया था (बरार देश का पूर्व नाम) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पांड्यवाटक:Name of a mountain in the middle part of malayagiri.मलयगिरि के मध्यभाग मे एक पर्वत।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == ध्यान : == मोक्ष: कर्मक्षयादेव, स चात्मज्ञानतो भवेत्। ध्यानसाध्यं मतं तच्च, तद्ध्यानं हिममात्मन:।। —योगशास्त्र : ४-११३ कर्म के क्षय से मोक्ष होता है, आत्मज्ञान से कर्म का क्षय होता है और ध्यान से आत्मज्ञान से कर्म का क्षय होता है और ध्यान से आत्मज्ञान प्राप्त होता है। अत: ध्यान…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विषम द्रष्टांत – Vishama Drstamta. An odd example of an event. जो दार्ष्टान्तिक के सदृश न हो उसे विषम द्रष्टांत कहते हैं “