मृत्यु!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृत्यु–Mratyu. Death. मरण; जीवो के प्राणों का विसर्जन या जीव का निष्प्राण हो जाना”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृत्यु–Mratyu. Death. मरण; जीवो के प्राणों का विसर्जन या जीव का निष्प्राण हो जाना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल बंध – Pudgala Bamdha. Assemblage of two or more matters. दो, तीन आदि पुद्गलों का समवाय संबंध. स्कंध; स्निग्ध- रुक्ष आदि गुणों के कारण पुद्गलों का जो बंध होता है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == कर्म-मुक्ति : == पक्के फलम्हि पडिए, जह ण फलं बज्झए पुणो विंटे। जीवस्स कम्मभावे, पडिए ण पुणोदयमुवेइ।। —समयसार : १६८ जिस प्रकार पका हुआ फल गिर जाने के बाद पुन: वृन्त से नहीं लग सकता, उसी प्रकार कर्म भी आत्मा से विमुक्त होने के बाद पुन: आत्मा (वीतराग) को…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वामा – Vaamaa.: Mother’s name of Lord Parshvanath. भगवान पार्श्वनाथ की माता “अपरनाम ब्राम्ही ,वर्मिला “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुण्यफल – Punyaphala. The fruit of meritorious actions. पुण्यकार्यों से प्राप्त होने वाला शुभ फल. अर्हन्त अवस्था को पुण्य का उत्कृष्ट फल जानना चाहिए “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वादीभसिंह (अजितसेन )- Vaadibhasingha (Ajitasena).: Name of the disciple of Vadiraj-2. वादिराज-2 के शिष्य ,यादवराज ऐरेयंग शांतराज तेलगु (ई.-1103 ) के गुरु “स्याद्वाद सिद्धि के रचयिता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंडितमरण –Panditamaran. A type of holy death of saints occurring from the 6th stage of spiritual development (Gunsthan) upto the 11th one. समाधिपूर्वक मरण; छाते गुणस्थान स्वे लेकर ग्यारहवें गुणस्थान तक में होने वाला मरण पंडित मरण है” भक्त प्रत्याख्यान, डंगिनी और प्रायोपगमन ये तीन मरण पंडित मरण है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मुमुक्षु : == मिच्छत्तासवदारं रुंभइ सम्मत्तदिढकवाडेण। हिंसादिदुवाराणि वि, दिढवयफलिहेहिं रुंभति।। —जयधवला : १-१०-५५ मुमुक्षु जीव सम्यक्त्व रूपी दृढ़ कपाटों से मिथ्यात्व रूपी आस्रव द्वार को रोकता है तथा दृढ़ व्रत रूपी कपाटों से हिंसा आदि द्वारों को रोकता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुचि – Shuchi. Purity (reg.worldly or spiritual), A type of peripatetic diety. पवित्रता; लौकिक और लोकोत्तर के भेद से ये दो प्रकार की होती है ” पिशाच व्यन्तारों का 8वां भेद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरलन राशि – Viralana Rashi. Spreaded numbers in the form of 1. जिस संख्या को एक-एक करके फैला दिया जायें ” जैसे ४ का विरलन होगा १,१,१,१, “