पीठ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पीठ – Pitha. Back of the body, Throne, a seat, Name of the 10th Rudra. हिन्दी भाषा में शरीर के पृष्ट भाग व संस्कृत भाषा में आसन, सिंहासन को पीठ कहते हैं. दसवें रूद्र का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पीठ – Pitha. Back of the body, Throne, a seat, Name of the 10th Rudra. हिन्दी भाषा में शरीर के पृष्ट भाग व संस्कृत भाषा में आसन, सिंहासन को पीठ कहते हैं. दसवें रूद्र का नाम “
उच्चाटन Driving away (by magical mean), Alienating, Estranging. एक प्रकार का जादू टोना जादू मंत्र चलाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म भाषा – Sukshma Bhaashaa. Internal speech (inner voice). शब्दाद्वैतवादी द्वारा मानी गई 4 प्रकार की वाणी में एक भेद । क्षयोपशम से प्रगटी आत्मा की अक्षर को ग्रहण करने की तथा कहने की शक्ति रूप लब्धि । जैन मतानुसार इसे लब्धि रूप भाव वचन स्वीकारा गया है ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिपासा परीषह – Pipasa Parisaha. Affliction of thirst. २२ परीषहों में एक परीषह; साधुओ का खेद रहित होकर प्यास की बाधा को सहना “
आलोचना शुद्धि Modification by criticism. आलोचना करके अपने दोष को मिटाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुक्ष्म निगोध – Sukshma Nigoda. See- Nigoda Suksma. देखे – निगोध सुक्ष्म ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिंडशुध्दि – Pimdasuddhi. Super purity of food, Human body with pescribed racial purity. आहार शुध्दि; मुनि ४६ दोष, ३२ अन्तराय, १४ मल दोष रहित भोजन ग्रहण करते हैं. शरीर शुध्दि; जाति व कुल शुध्दि से युक्त मानव शारीर “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यायरत्नाकमाला – Nyaayaratnamaalaa. Name of a book written by Parthsarthi Mishra. मीमांसा दर्शन साहित्य प्रवर्तक पार्थसारथिमिश्र द्वारा रचित एक ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्गित संवर्गित – Vargita Sanvargita. Raising a number to its own power. विरलन –देय से प्राप्त संख्याओं को परस्पर गुणा कर देने से उस संख्या का वर्गित संवर्गित प्राप्त होता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भरतेश्वराभ्युदय – Bharatesvarabhyudaya. A book written by Pandit Ashadhara. पं. आशाधर जी (ई. ११७३-१२४३) कृत एक ग्रंथ “