तत्वार्थराजवर्तिक!
तत्वार्थराजवर्तिक A book written by Acharya Aklanka Bhatta. आचार्य अकलंक देव (ई.620-680) द्वारा रचित एक ग्रंथ। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत्वार्थराजवर्तिक A book written by Acharya Aklanka Bhatta. आचार्य अकलंक देव (ई.620-680) द्वारा रचित एक ग्रंथ। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाद-विवाद – Vaad-Vivaada.: Debate,Mutual discussion,Argumentation. अपने पक्ष का प्रमाण से स्थापना करना वाद एवं दूसरे के मत को खंडन करने वाले वचन कहना विवाद है “
जन्मकल्याणक Celebration of the birth event of Jaina Lord. भगवान के पांच कल्याणकों में एक , तीर्थंकरों के जन्म का उत्सव ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुक्र (देव) – Shukra (Deva). An Indra of Shukra- Mahashukra heavens. शुक्र – महाशुक्र कल्प युगल का इन्द्र “
एकत्ववितर्क अवीचार The absolute supreme meditation. अर्थ व्यंजन और योग की संक्रान्ति को हटाकर मन को निश्चल करके 12 वें गुणस्थान को प्राप्त करना और फिर ध्यान लगाकर पीछे नहीं हटना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचिक व्युत्सर्ग– Vaachika Vyutsarga.: See- Vaachanika Vyutsarga. देखें – वाचनिक व्युत्सर्ग “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचाग्नि तप – Panchaagni Tapa. A type of austerity related to five types of fire. बालतप (मिथ्यातप); तापस 5 अग्नियों के मध्य बैठकर यह तप करते हैं “
चन्द्रचिन्ह A kind of Kuru descendant, The significant symbol of Lord Chandraprabha, The symbol of Lord Svayamprabha present at Videh Kshetra. कुरुवंश के एक राजा का नाम, चंद्रप्रभ भगवान का चिन्ह, विदेह क्षेत्र में स्थित स्वयंप्रभ का चिन्ह ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचनिक – Vaachanika. Which can be expressed in words. वचनों के द्वारा किया जाने वाला या शब्दों में अभिव्यक्त “