युक्ताचारी हिंसा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युक्ताचारी हिंसा – रागादि कशायभावरूप हिेंसा। Yuktacari Himsa-Violenceful thoughts (a fault)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युक्ताचारी हिंसा – रागादि कशायभावरूप हिेंसा। Yuktacari Himsa-Violenceful thoughts (a fault)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाणसंग्रहालंकार- प्रमाण संग्रह टीका विशयक एक ग्रंथ। Pramanasangrahalankara- Name of a Commentary book
दर्शन विनय Reverence to right faith. सम्यग्दर्शन के अंगों का पालन , भक्ति पूजा आदि गुणों को धारण तथा शंका आदि दोषों के त्याग को सम्यक्त्व विनय या दर्शन विनय कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण (द्रव्य, क्षेत्र, काल)- द्रव्य क्षेत्र काल की मर्यादा। Pramana (Dravya, Ksetra, kala)- Measure related to matter, region & time
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रोष – क्रोधी पुरूश का तीव्र परिणाम, कोप। Rosa-Anger, rage, Indignation
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभु- धाति कर्मो के क्षय से जिसने केवज्ञान के द्वारा परमार्थ को जान लिया है, सकल तŸवों का जिसने उपदेष दिया है वह प्रभ्ज्ञु होता है अर्थात अरिहंत भगवान। Prabhu- Almighty God
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राग परिहार – परद्रव्यों के प्रति मोहभाव को छाडना, उदानसीता। Raga parihara- Avoidance of attachment, Non-attachment
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभ- सौधर्म स्वर्ग का 21 वाँ पटल व इन्द्रक का नाम। Prabha- Name of the 21stpatal (layer) &Indrak of Saudharma heaven
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति सत्त्व – Prakrti Sattva. Attachment of karmas with soul. अपनी स्थिति के अनुसार कर्म प्रक्रति के कर्म प्रदेशों का आत्मा प्रदेशों के साथ संलग्न रहना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रायश्चित विधान- आचार्य इन्द्रनंदि कृत ग्रंथ। PrayascittaVidhan- Name a book written by acharyaIndranandi