दुःप्रणिधान!
दुःप्रणिधान Arrogant or Illusive tendency (an infraction). सामायिक शिक्षा व्रत का एक अतिचार । सामायिक के समय मन – वचन- काय की प्रवृत्ति रागरूप या प्रमादरूप होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दुःप्रणिधान Arrogant or Illusive tendency (an infraction). सामायिक शिक्षा व्रत का एक अतिचार । सामायिक के समय मन – वचन- काय की प्रवृत्ति रागरूप या प्रमादरूप होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पतिघात – Pratighaata. Counterblow, Reaction, Obstrution. एक मूर्तिक पदार्थ का दूसरे मूर्तिक पदार्थ के द्वारा व्याघात होना ” प्रतिकार, प्रतिषेध, बाधित होना “
दीप A lighted lamp, An auspicious device which is to be kept near idol in the temple, A worshipping article. मंदिरों में प्रतिमा के समीप रहने वाले 108 उपकरणों में से एक , पूजा साम्रगी का एक द्रव्य।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतर – Pratara. Area or (particular unit)2. एक-एक आकाश प्रदेशात्मक पंक्ति के वर्ग को प्रतर कहते है “
दिग्वास Former name of Digambar Jain community. A name of Jain Lord. दिगम्बर सम्प्रदाय को पूर्व में निग्र्रन्थ श्रमण संघ के नाम से पुकारा जाता था । उपरांत वह दिग्वास और फिर दिगम्बर कहलाने लगा । भगवान के 1008 नामों में से एक नाम। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्पदंत (कवि) – Puspadamta (Kavi). A poet who wrote Yashodhar Charitra & Nagkumar Charitra etc. books. एक कवि जिन्होंने यशोधर चरित्र व् नागकुमार चरित्र आदि ग्रंथों की रचना की “
दारूवेणि A river of Arya Khand (region). आर्य खण्ड की एक नदी। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्करद्वीप – Puskaradvipa. Name of the 3rd island of middle universe. मध्यलोक का तृतीय द्वीप- जो की कालोदधि समुद्र को घेरकर १६,००००० योजन के विस्तार से युक्त है. अपरनाम- पुष्करद्वीप. इसके मध्य में चूड़ी के आकार का मानुषोत्तर पर्वत होने से यह दो भागो में विभक्त है, जिन्हें पुष्करार्ध्द कहते हैं “
दर्शन श्रावक A householder follower of first model stage of right faith. दर्शन प्रतिमा धारी जो पंच उदुम्बर सहित सातों व्यसनों का परित्याग आदि करता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुदेव – Purudeva. Another name of Lord Adinath, A type of Kimpurusha peripatetic deities. आदिनाथ भगवान का अपरनाम, किंपुरुष व्यंतर देव का एक भेद “