चित्तेंद्रिय निरोध!
चित्तेंद्रिय निरोध A basic restraint of saints (controlling of senses). ,उमियों का एक मूलगुण : ५ इन्द्रियों तथा मन को वश में रखना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चित्तेंद्रिय निरोध A basic restraint of saints (controlling of senses). ,उमियों का एक मूलगुण : ५ इन्द्रियों तथा मन को वश में रखना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्दश पूर्वित्व A type of supernatural power possessed by great saints (Shrut Kevalis). एक प्रकार की ऋद्धि. द्वादशांग श्रुतज्ञान को धारण करने वाले महर्षि अर्थात् श्रुतकेवली इस ऋद्धि के धारी होते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चारित्रमोह क्षपक The destroyer of conduct deluding Karmas. चारित्र की प्राप्ति ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पष्ट – Spasta. Clear, unambiguous, Obviousness.जिसके समझने या देखने मे कोई कठिनता न हो, व्यक्त।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संरंभ – Sanranbha. Resolution for some activity. जीवाधिकरण का एक भेद; कार्य करने का संकल्प करना “
छात्रचूड़ामणि A story on Jeevandhar Swami written by Vadibh-singh Odayadev. वादीभसिंह ओडयदेव (ई. ७७०-८९०) कृत जीवन्धर स्वामी का चरित्र ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्षन इन्द्रिय – Sparssana Indriya. The sense organ of touch.जिसके द्वारा स्पर्श किया जाता है उसे स्पर्शन इन्द्रिय कहते है।
देह Body, a type of peripatetic celestial. शरीर, काया, पिशाच, जातीय व्यंतर देवों का एक भेद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिश्रानुभाव–Mishraanubhav. A type of mixed dispositions (virtuous & vicious). शुद्धोप्योग एवं शुभोपयोग मिश्रित या शुभ–अशुभोपयोग रूप मिश्रित संवेदन”