उपादान कारण(शाश्वत)!
उपादान कारण(शाश्वत) Affluent cause (eternal). सत्य व अमर उपादान कारण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उपादान कारण(शाश्वत) Affluent cause (eternal). सत्य व अमर उपादान कारण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शांत कषाय – Shanta Kashaaya. Subsided passion. उपशांत कषाय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राश्ट्रकूटवंष – जंगतंुग अमोधवर्श आदि राजाओ का वंष। इस वंष का राज्य मालवा प्रदेष में था। राजधानी मान्यखेट थी। Rastrakutavamsa-Name of a dynasty
उपस्थापना An expiation, Reinitiation . प्रायश्चित किसी साधु का ऐसा अपराध हो जिससे उसकी दीक्षा छेदकर पुनः दीक्षा दी जाये।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नत्रयव्रत – वर्श में 3 बार, भादो, माध चैत्र में विघिपूर्वक षु, 13 से पूर्णिमा तक किया जाने वाला व्रत। Ratnatrayavrata- A particular type of vow or fasting
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मलोक – Brahmaloka. An upper world (the 5th heaven). ५ वां स्वर्ग, लौकांतिक देवों की निवास भूमि “
ईश्वरसेन Name of an Acharya. नंदिषेण प्रथम के शिष्य एंव नंदिषेण द्वितीय के गुरु।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावतीर्थ – Bhavatirtha. The soul with right perception, knowledge & conduct. तीर्थ का एक भेद; सम्यग्दर्शन, ज्ञान, चारित्र युक्त आत्मा भाव तीर्थ है “