श्रावक!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रावक – Shraavaka. A householder who follows religious instructions with reverence, Lay followers in the Jaina order. विवेकवान विरुत्तचित अणुव्रती गृहस्थ ” इसके पाक्षिक, नैष्ठिक व साधक तीन भेद है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रावक – Shraavaka. A householder who follows religious instructions with reverence, Lay followers in the Jaina order. विवेकवान विरुत्तचित अणुव्रती गृहस्थ ” इसके पाक्षिक, नैष्ठिक व साधक तीन भेद है “
दंडासन तप A type of posture of meditation (sitting erectly). कायक्लेश , दण्ड के समान सीधा बैठना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रसनाली Channel of the mobile bios. लोक के मध्य भाग में एक राजू लम्बी , चैड़ी और कुछ कम 13 राजू ऊंची त्रसनाली है । त्रसजीव इसके भीतर ही रहते हैं बहतर नहीं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रद्धावान – Shraddhaavaan. One possessing right faith or reverential belief. जो जिनवचनों में श्रद्धान करता है अर्थात सम्यग्दृष्टि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शौचधर्म – Shauchdharma. Observance of purity or greedlessness (victory over greed). 10 धर्मों में चौथा धर्म ” लोभ पर विजय पाना ही शौचधर्म है, इससे सातावेदनीय कर्म का आस्रव होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशस्त ध्यान- प्रषंसनीय ध्यान। धर्मध्यान, शुक्लध्यान जो मोक्ष के कारण है। Prasasta Dhyana- Commendable meditation
गौरी Ruling female demigod of Lord Vasupujya, A super knowledge, Name of a city in the north of Vijayardh mountain. भगवान् वासुपूज्य की शासन देवी, एक विद्या , विजयार्ध पर्वत की उत्तरश्रेणी का एक देश ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शिष्य : == पितरमिव गुरुमुपचरेत्। —नीतिवाक्यामृत : ११-३४ शिष्य गुरु के साथ पिता के समान व्यवहार करे। प्रज्ञयातिशयानो न गुरुमवज्ञायेत। —नीतिवाक्यामृत : ११-२० अधिक प्रज्ञावान होने पर भी शिष्य गुरु की अवज्ञा न करे। संदिहानो गुरुमकोपयन्ननापृच्छेत्। —नीतिवाक्यामृत : ११-१५ संदेह होने पर शिष्य इस प्रकार से पूछे कि…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवाह क्रम- धारावाहिक; प्रतिसमय होने वाले द्रव्यों के उत्पाद व्यय। Pravaha Krama- Sequential flow