प्रतिंद्र!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिंद्र – pratimdra Title for the secondary indras मुख्य इन्द्र के पश्चात् द्वितीय श्रेणी के इन्द्र।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिंद्र – pratimdra Title for the secondary indras मुख्य इन्द्र के पश्चात् द्वितीय श्रेणी के इन्द्र।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्मोत्तर:A Deggajendra mountain situated in Bhadrashal forest, A ruler’Nagendradev; of Rajatprabh Summit of Kundal mountain, A deity resident of Nandyavart summit of Ruckak mountain. भद्रशाल वन में स्थित एक दिग्गजेन्द्र पर्वत, कुण्डल पर्वत स्थित रजतप्रभ कूट का स्वामी नागेन्द्रदेव, रूचक पर्वत के नन्द्यावर्त कूट पर रहने वाला देव ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भगीरथ – Bhagiratha. The son of the king Sagar , a chakravarti (em-peror). सगर चक्रवर्ती का पुत्र जिसने अपना पूर्वभव सुनकर दीक्षा ली एंव मोक्ष प्राप्त किया “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्य – Brahma. A ruling demigod of Lord Pushpdant, The all pervading spirit of the universe, The supreme soul. तिलोयपण्णति के अनुसार पुष्पदंत भगवान का शासक यक्ष , कहीं इनका नाम अजितदेव भी आता है ” शब्द; समस्त वस्तुओं को प्रकाश करने वाला और स्यात् पद से चिहिृत शब्द ब्रह्म है ,…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वस्तिक – Svastika. Name of Diggajendra mountain in Bhadrashal forest situated in Videh Kshetra (region). Name of summits situated at Vidyutprabh Gajdant & Ruchak mountains, name of a governing deity of maniprabh summit of Kundal mountain. विदेह क्षेत्र मे स्थित भद्रषाल मे एक दिग्गजेन्द्र पर्वत, विद्युत्प्रभ गजदत्तस्थ व रुचक पर्वतस्थ एक-एक कूट, कुण्डल पर्वतस्थ…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भय – Bhaya. Fear, terror. भीती, डर – यह ७ प्रकार का होता है इहलोक, परलोक, अरक्षा, अगुप्ति, मरण, वेदना, आकसिम्क “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बिजबुद्धि ऋद्धि – Bija Buddhi Rddhi. A type of supernatural power pertaining to know – ing the whole Dvadashang by a single Bijapad. ऋद्धि ; जिसके प्रभाव से साधु एक ही बिजपद के आश्रय से सम्पूर्ण द्वादशांग को जानने और विचार करने में समर्थ होते हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == धर्म : == धम्मो वत्थुसहावो। —कर्तिकेयानुप्रेक्षा : ४७८ वस्तु का अपना स्वभाव ही उसका धर्म है। धर्मो बंधुश्च मित्रञ्च धर्मोऽयं गुरुरंगिनाम्। तस्माद् धर्मे मिंत धत्स्व स्वर्गमोक्षसुखदायिनि।। —आदिपुराण : १०-१०९ धर्म ही मनुष्य का सच्चा बंधु है, मित्र है और गुरु है। इसलिए स्वर्ग एवं मोक्ष के सुख देने…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्णमयी – Svarnamayii. The 7th circumference of Sumeru mountain. सुमेरु पर्वत की सातवीं परिधि जो सुवर्णमयी है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मवत्: Name of an area of Videh Kshetra (region), Name of summit and deity of Vasshargiri. विदेह स्थित एक क्षेत्र एवं वक्षारगिरि का कूट व देव का नाम।