प्रवचन प्रभावना!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवचन प्रभावना- आगम के अर्थ का कीर्ति विस्तार या वृद्धि करना। Pravacanaprabhavana- Glorification of scriptures or sermons
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवचन प्रभावना- आगम के अर्थ का कीर्ति विस्तार या वृद्धि करना। Pravacanaprabhavana- Glorification of scriptures or sermons
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संश्लेष – Sanshlesa. Act of synthesising or combining. मिलना ” स्निग्धत्व और रुक्षत्व गुण से अणु आदि का बंध होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रयोग- मन वचन एवं काय रुप योगों को प्रयोग शब्द से ग्रहण किया जाता है। Prayoga – Application (use), effort, experiment
देशसंधि The joining land of two countries (borders). दो देशों की सीमा भूमि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमृशा- भरत क्षेत्र आर्यखण्ड की एक नदी। Pramrsa- A river of Bharat kshetraaryakhand (region)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक वनस्पति काय- प्रत्येक वनस्पति कायिक जीव द्वारा छोड़ा गया शारीर अभवा पृथक-पृथक वनस्पति जीव जैसे; खैर आदि वनस्पति। pratyeka vanaspati kaya – beings pretaining to plant life.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण योजन- क्षेत्र का प्रमाण विषेश। PramanaYojana- An area unit
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमकगिरी–Yamakgiri. See – Yamak. देखे–यमक” गोल, उचाई 1000 योजन, नीचे की चौड़ाई 1000योजन, ऊपर की चौड़ाई 500 योजन” इन पर इसी नाम के धारक देव रहते है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहस्रार – Sahasraara. Name of the 12th heaven. 12वां स्वर्ग, यहां का इन्द्र शतार है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == स्नेह : == नियलेहि पुरिओ च्चिय वच्चइ पुरितो जहिच्छियं देसं। एक्कं पि अंगुलमिणं, न जाइ घणनेह—पडिबद्धो।। —पउमचरिउ : ५६९ जंजीरों से बंधा हुआ मनुष्य इच्छानुसार देश में जा सकता है, पर घने स्नेह से जकड़ा हुआ मनुष्य एक अंगुल भी नहीं जा सकता।