तीर्णकर्ण!
तीर्णकर्ण A country of Bharat kshetra in the northern Arya khand (region). भरतक्षेत्र के उत्तर आर्यखण्ड का एक देश। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तीर्णकर्ण A country of Bharat kshetra in the northern Arya khand (region). भरतक्षेत्र के उत्तर आर्यखण्ड का एक देश। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्गशलाका राशि – Vargashalaakaa Raashi.: Desired resultant quantity of Log2 Log2 (a mathematical operation). दो के वर्ग से लेकर जितनी बार की राशि विवक्षित हो उतनी वर्गशलाका राशि जानना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पार्श्वस्थ (साधु) – Parsvastha (Sadhu). Saints not observing the duties of a saint life. इंद्रिय, कषाय और विषयों से पराजित होकर चरित्र को तृण के समान समझने वाले मुनि “
तिर्यक् सामान्य General property. अनेक द्रव्यों में अथवा अनेक पर्यायों में जो सादृष्यता का बोध कराने वाला सदृष्य परिणाम होता है।, वह तिर्यक् सामान्य है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वरसेना – Varasenaa.: Name of the first chief Aryika (Ganini) in the holy assembly of Lord Vasupujya. भगवान वासुपूज्य के समवशरण में मुख्य आर्यिका (गणिनी) ” अपरनाम ,सेनार्या , सेना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यायचूलिका – Nyaayachoolikaa. Name of a book written by shri Aklanka Bhatt. श्री अकलंक भट्ट (ई. 640-680) कृत एक न्याय ग्रंथ “
तिगिंछ Name of a pond situated at Nishadh mountain. निषध पर्वत पर स्थित एक हृद। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वनभूमि – Vanabhoomi: A land of natural temples with temple-trees (Chaitya Vriksh). अकृत्रिम चैत्यालयों को एक भूमि जिसमे चैत्यवृक्ष होते हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == ज्ञान : == सुत्तं अत्थनिमेणं, न सुत्तमेत्तेण अत्थपडिवत्ती। अत्थगई पुण णयवाय गहणलीणा दुरभिगम्मा।। —सन्मति तर्क् प्रकरण : ३-६४ सूत्र (शब्द पाठ) अर्थ का स्थान अवश्य है, परन्तु मात्र सूत्र से अर्थ की प्रतिपत्ति नहीं हो सकती। अर्थ का ज्ञान तो गहन नयवाद पर आधारित होने से बड़ी कठिनता…
तारणस्वामी The writer of a book ‘Upadesh Shuddhasar’. ताण पंथ को प्रारंभ करने वाले, उपदेशशुद्धसार के रचयिता (लगभग 500 वर्ष पूर्व)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]