राग, द्वेष, मोह आदि को जीतना तप कहलाता है गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी तप वह है जहाँ परिग्रह का त्याग किया जाता है, तप वह है जहाँ उपसर्ग को सहन किया जाता है, तप वह है जहाँ राग, द्वेष, मोह आदि भावों को जीता जाता है, तप वह है जहाँ अपनी आत्मा का चिन्तन किया…