मंगलग्रहारिष्ट श्री वासुपूज्य जिन चालीसा
रत्नत्रयव्रतकथा. व्रतविधिः- भाद्रपद शु. १२ दिवशीं या व्रतधारकांनीं एक- भुक्ति करात्री, आणि १३-१४-१५ या तीन दिवशीं प्रातःकाळीं सुखोष्ण जलाने अभ्यंगस्नान करून आपल्या अंगावर दृढधौत वले धारण करावीत. सर्व पूजा सामग्री हातीं घेऊन जिनालयास जावे. मंदिरास तीन प्रदक्षिणा घालून ईर्यापथशुद्धि वगैरे क्रियापूर्वक जिनेंद्रास भक्तीनें साष्टांग नमस्कार करावा. मंडपश्रृंगार करून वर चंद्रोपक बांधावें, देवापुढे शुद्धभूमीवर पंचवर्षांनीं रत्नत्रययंत्रदल…
Final Result 30-11-24 Final Paper With Answers
क्षमा आत्मा का स्वभाव है उत्तम क्षमा क्षमा वीरस्य भूषणम् : क्षमावाणी पर्व श्री भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर बडी मूर्ति रायगंज में दशलक्षण पर्व के समापन के अवसर पर भगवान ऋषभदेव की बड़ी मूर्ति का १००८ कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया एवं सारे विश्व में अिंहसा और शांति की कामना से महाशांतिधारा सम्पन्न की…
दशलक्षण महापर्व के अन्तर्गत हवन पूर्णाहुति एवं भव्य शोभायात्रा निकाली गई विश्वशांति महाअनुष्ठान सम्पन्न ब्रह्मचारी सदा सुखी : उत्तम ब्रह्मचर्य आत्मा ही ब्रह्म है, उस ब्रह्मस्वरूप आत्मा में चर्या करना ब्रह्मचर्य है अथवा गुरु के संघ में रहना भी ब्रह्मचर्य है। इस व्रत के प्रभाव से जीव संसार को पार कर लेता है, इस व्रत…