जैनशास्त्रों में तन्त्र-मन्त्रों के उल्लेख!
जैनशास्त्रों में तन्त्र-मन्त्रों के उल्लेख जेण विणा लोगस्स वि ववहारो सव्वहा ण णिव्वहइ। तस्स भुवनेक्कगुरुणो णमो अणेगंतवायस्सयशस्तिलकचम्पू महाकाव्य, अष्टम आश्वास, पद्य २२।। लोक में जितने प्रकार के पूजा—पाठ अथवा विधि— विधान पाये जाते हैं, वे सब तन्त्र हैं। तन्त्र के लिये यन्त्र और मन्त्र की आवश्यकता होती है। उनके अभाव में तन्त्र—सिद्धि में पूर्णता नहीं…