स्वर्णकूला देवी!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्णकूला देवी – Svarnakuulaa Devi. Name of the governing deity of Svarnakuulaa Kund (a pond). स्वर्णकूला कुण्ड की स्वामिनी देवी।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्णकूला देवी – Svarnakuulaa Devi. Name of the governing deity of Svarnakuulaa Kund (a pond). स्वर्णकूला कुण्ड की स्वामिनी देवी।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्णकूला कंूट – Svarnakuulaa Kuuta. Name of the 7th summit of Shikhri mountain. शिखरी पर्वतस्थ 7वां कूट।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्णकूला कुंड – Svarnakuulaa Kumda. Name of a pond situated in Hairayavat region. हैरण्यवत क्षेत्रस्थ एक कुंड।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्ण कमल – Svarna Kamala. Gold lotus, one of the 14 transcendental creations of Lord Arihant (natural creation of gold/golden lotuses in all directions). सोने के कमल, अर्हत भगवान के 14 देवकत अतिषयो मे एक अतिषय, तीर्थकरो के श्रीविहार मे चरणो के नीचे एवं चारो दिषाओ मे व विदिषाओ मे स्वर्ण कमल की रचना…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्ण – Svarna. Gold, name of a city in the south of Vijayardh mountain. सोना, एक धातु, विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्गवासी देव – Svargavaasii Deva. Heavenly deities. कल्पवासी देव-वैमानिक देव अर्थात् 16 स्वर्ग, 9 गै्रवेयक, 9 अनुदिष, 5 अनुत्तर के निवासी देव।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वर्ग – Svarga. The heaven, aboding place of deities. इसका अपरनाम कल्प है ये ऊध्र्वलोक मे स्थित है। स्वर्ग के दो, विभाग है-कल्प व कल्पातीत। यहाॅ वैमानिक देव रहते है अथवा कल्पोपपन्न व कल्पातीत देवो के रहने के स्थान।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] स्वरुपास्तित्व – Svaruupaastitva. A type of existence; power to show existence of each & every matter separately. अस्तित्व के दो भेदो मे एक भेद। अवान्तर सत्ता-प्रतिनियत वस्तुवर्ती तथा स्वरुपास्तित्व की सूचना देने वाली (अर्थात् पृथक्-पृथक् पदार्थ का पृथक्-पृथक् स्वतंत्र अस्तित्व बताने वाली ) अवान्तरसत्ता है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वरुपासिद्व हेत्वाभस – Svaruupasiddha Hetvaabhaasa. A type of fallacy (eg. Considering existence of words only due to their visionary effect). शब्द परिणामी है, क्योकि यह आॅख से देखा जात है (यह सही हेतु न होकर गलत हेतु है)। यह अविद्यमान सत्ता वाला अर्थात् स्वरुपासिद्व हेत्वाभास हैं
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वरुपाभाव – Svaruupabhaava. Absence of similarity in nature between the two of lack of the characteristic nature of a matter in the other. जो द्रव्य है वह गुण नही है वह द्रव्य नही है अर्थात् एक दूसरे मे जो उसका अभाव अर्थात् तदूप होने का अभाव है वह तद्भाव लक्षण अतद्वाव है।