स्वयंप्रभ!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वयंप्रभ – Svayammprabha. Name of the 4th predestined Tirthankar (Jaina Lord), name of a summit of Ruchak mountain. भावीकालीन चैथे तीर्थकर, रुचक पर्वतस्थ एक कूट।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वयंप्रभ – Svayammprabha. Name of the 4th predestined Tirthankar (Jaina Lord), name of a summit of Ruchak mountain. भावीकालीन चैथे तीर्थकर, रुचक पर्वतस्थ एक कूट।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वमुख उदय – Svamukha Udaya. Natural fruition of karmas. कर्म प्रकृतियो का आपरुप होकर ही उदय मे आना स्वमुख उदय है एवं अन्य प्रकृति रुप होकर उदय मे आना परमुख उदय हैं।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभावाराधना – Svabhaavaaraadhanaa. Engrossment in self. समता, माध्यस्थता, शुद्व भाव, वीतरागता, धर्म, स्वभाव की आराधना ये एकार्थवाची शब्द है एवं इन सबको ही स्वभाव की आराधना कहा गया है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] स्वभाव स्थिति – Svabhaava Sthiti. State of absolute engrossment in soul. निश्चय रत्नत्रय। स्वरुप मे लीनता या निश्चय अवस्थान।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभाव सिद्व – Svabhaava Siddha. . Self proved or identified matter. अहेतुक या स्वतः सिद्व। जैसे वास्तव मे द्रव्यो मे द्रव्यान्तर की उत्पत्त्ति नही होती, क्योकि सर्व द्र्रव्य स्वभाव सिद्व है उनकी स्वभाव सिद्वता अनादि से है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वद्रव्यादि ग्राहक द्रव्यार्थिक नय – Svadravyaadi Graahaka Dravyaarthika Naya. A standpoint accepting the real nature of a matter. जो नय स्वद्रव्यादि चतुष्टय की अपेक्षा से द्रव्य का सत् स्वरुप ग्रहण करे।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभावविरुद्वानुपलब्धि हेतु – Svabhaavaviruddhaanupalabdhi Hetu. A type of cause reg. absence of some counter property (opposite to the real one) in a matter. अनुपलब्धि हेतु के प्रतिषेध रुप विरुद्वानुपलब्धि के तीन भेदो मे एक भेद। हर एक पदार्थ नित्य, अनित्य आदि अनेक धर्मवाला है क्योकि नित्यत्व आदि एक धर्म का अभाव है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभाववाद – Svabhaavavaada. A doctrine related to the nature of a matter. काॅटे आदि मे तीक्ष्णता एवं पक्षु-पक्षी आदि मे अनेकपना उनमे स्वभाव से ही है ऐसा एकांत से स्वभाव को मानना एवं ज्ञान वास्तव मे जीव का स्वरुप है, उस हेतु से जो अखण्ड अद्वैत स्वभाव मे लीन है ऐसा निश्चय स्वभाव वाद…
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभाव पुद््गल – Svabhaava Pudgala. A pure particle of a Pudgal. पुद्गल द्रव्य के दो भेदो मे एक भेद। पुद्गल का एक शुद्व परमाणु स्वभाव पुद्गल और स्कंथ विभाव पुद्गल कहलाते है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभाव नय – Svabhaava Naya. A standpoint expressing the real nature of matter. द्रव्यार्थिक नय, द्रव्य के वास्तविक स्वभाव का कथन करता है।