स्वक्षेत्र!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वक्षेत्र – Svaksetra. Occupied space of matters.एक द्रव्य जितने क्षेत्र को रोक करके रहता है वह उस द्रव्य का स्वक्षेत्र है और अन्य क्षेत्र उसका पर क्षेत्र है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वक्षेत्र – Svaksetra. Occupied space of matters.एक द्रव्य जितने क्षेत्र को रोक करके रहता है वह उस द्रव्य का स्वक्षेत्र है और अन्य क्षेत्र उसका पर क्षेत्र है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वकाल निर्जरा – Srakaala Nirjaraa. Destruction of Karmas on their maturation.निर्जरा के दो भेदो मे एक भेद, सविपाक निर्जरा जो स्वकाल पक्च होकर चारो गति वाले जीवो की होती है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्व-उपकार – Sra – Upakaara. Benefitting self (reg. soul).आत्महित।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्व-अहिंसा – Sra – Ahimsaa. Pure nature of soul.जीव का शुद्व स्वभाव की स्वअहिंसा है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्व – Sra. Self, personal, own.अपना, निजी, आत्मपरक या अपनी जाति से संबंध रखने वाला।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्रष्टा – Srastaa. The creator.बनाने वाला, विधि, स्रष्टा, विधाता, दैव, पुराकृत, कर्म और ईश्वर ये सब कर्मरुपी ईश्वर के पर्यायवाचक शब्द है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्यान्नित्यत्व – Syaannityatva. Eternity of some particular characteristics in matter.द्रव्य के सामान्य 11 स्वभावो मे एक स्वभाव। अपनी अपनी नाना पर्यायो मे यही वही है इस प्रकार द्रव्य की प्राप्ति कथंचित् नित्य स्वभाव है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्याद्वादोपनिषद् – Syaadvaadopanisad. Name of a Book written by Acharya Somsen.आचार्य सोमसेन (ई0 943-968) कृत स्याद्वाद न्याय का प्ररुपक संस्कृत भाषाबद्व ग्रंथ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्याद्वादसिद्वि – Syaadvaadasiddhi. Name of a treatise written by Acharya Vadibhisingh. आचार्य वादीभसिह (ई0 1103) द्वारा रचित संस्कृत भाषाबद्व न्याय विषयक ग्रन्थ।