आतप!
आतप Warming sunlight. धूप, सूर्य की प्रभा जो उष्ण होती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आचारांगधर Saints possessing knowledge of Achar Anga (a scriptural part).आचार रंग के ज्ञाता मुनि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आचारांग A part of scriptural knowledge (shrutgyan) containing description about conduct of saints & householdess. जिनवाणी के 12 अंगों में पहला अंग जिसमें मुनि एंव श्रावकों के आचरण का कथन है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आचारसार A book written by ‘Acharya’ Veernandi . आचार्य वीरनंदि (वि.सं. 556)कृत मुनि आचरण ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आचारवर्द्धन व्रत A type of vow. एक प्रकार का व्रत जिसमें सौ दिन उपवास एंव उन्नीस पारणा शामिल हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गौतमगणधर- जैनधर्म के २४ वें तीर्थंकर भगवान महावीर के प्रमुख गणधर । [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावतीर्थ – Bhavatirtha. The soul with right perception, knowledge & conduct. तीर्थ का एक भेद; सम्यग्दर्शन, ज्ञान, चारित्र युक्त आत्मा भाव तीर्थ है “
जैन साहित्य का संक्षिप्त इतिहास प्रस्तुति – प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चन्दनामती माताजी परिचय हिन्दी के प्रसिद्ध कवि मैथिलीशरण गुप्त ने एक कविता में लिखा है- अंधकार है वहाँ जहाँ आदित्य नहीं है। निर्बल है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।। अर्थ- किसी भी देश का गौरव वहाँ के साहित्य भण्डार से आंका जाता है यह बात…
अरिहंत-जिन्होंने चार घातिया कर्मों का नाश कर दिया है, जिनमें छियालीस गुण होते हैं और अठारह दोष नहीं होते हैं, वे अरिहंत [[परमेष्ठी]] कहलाते हैं। अथवा The omniscient Lord. पंच परमेष्ठियों में प्रथम परमेष्ठी,जिन्होंने चार घातिया कर्मों का नाश कर दिया है। इनके अपरनाम-अरिहंत,अरुहंत,अरहंत हैं । [[श्रेणी:शब्दकोष]][[श्रेणी:पुत्र]]