गणिनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी ‘‘जिनके सम्मान में यह पुरस्कार स्थापित है’’ जन्मस्थान-टिकैतनगर (बाराबंकी) उ.प्र. जन्मतिथि-आसोज सुदी १५ (शरदपूर्णिमा) वि. सं. १९९१, (२२ अक्टूबर १९३४) जाति-अग्रवाल दि. जैन, गोत्र-गोयल, पूर्व नाम-कु. मैना माता-पिता-श्रीमती मोहिनी देवी एवं श्री छोटेलाल जैन आजन्म ब्रह्मचर्य व्रत-ई. सन् १९५२ में बाराबंकी में शरदपूर्णिमा के दिन क्षुल्लिका दीक्षा-चैत्र कृ. १, ई. सन्…
आहार शुद्धि दिगम्बर साधु संयम की रक्षा हेतु शरीर की स्थिति के लिए दिन में एक बार छयालीस दोष-चौदह मल दोष और बत्तीस अंतरायों को टाल कर आगम के अनुकूल नवकोटि विशुद्धि आहार ग्रहण करते हैं । इसी को पिंडशुद्धि या आहारशुद्धि कहते हैं । छ्यालीस दोष दिगम्बर मुनि के आहार के छयालीस दोष माने…