बुद्धिजीवी!
विशेष बुद्धिमान स्त्री-पुरुषों को बुद्धिजीवी कहते हैं ।
जैन धर्म का कर्म सिद्धान्त सुदर्शन — गुरूजी ! कर्म किसे कहते हैं ? गुरूजी —जिसके द्वारा जीव परतंत्र किया जाता है वह कर्म है । इस कर्म के निमित्त से ही यह जीव इस संसार में अनेकों शारीरिक, मानसिक और आगंतुक दु:ख को भोग रहा है । सुदर्शन —इस कर्म का सम्बन्ध जीव के…
पुण्य और पाप के विषय में अनेकांत ( प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी) पापं ध्रुवं परे दु:खात् पुण्यं च सुखतो यदि। अचेतनाकषायौ च बध्येयातां निमित्तत:।।९२।। अर्थ — यदि पर को दु:ख उत्पन्न कराने में नियम से पाप बन्ध होता है और पर को सुख उत्पन्न कराने से नियम से पुण्य का बन्ध होता है…
[[श्रेणीःशब्दकोष]] इष्टवियोगज-मनोग्य वस्तु के वियोग होने पर उसकी प्राप्ति की सतत चिन्ता करना इष्टवियोगज आर्त्तध्यान है”
दिल के लिए क्या है नया center]] छोटा-सा दिल हमारे शरीर का सबसे अहम अंग है। इसने काम करना बंद किया तो जिंदगी खत्म। दिल की बीमारियों की जांच और इलाज के कई नए तरीके सामने आए हैं। इनके जरिए हम कैसे अपने दिल को ज्यादा सेहतमंद रख सकते हैं, 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट…