तात्पर्यार्थ में शान्तरस एवं मार्गदर्शन
तात्पर्यार्थ में शान्तरस एवं मार्गदर्शन जिनागम के स्वाध्याय का लक्ष्य वस्तुतत्वविचार, वैराग्य एवं आत्मविशुद्धि है। वह भावविशुद्धि पर आधारित है। जब मन शान्त हो जाता है तब आत्मानुभव रूप शान्तरस का आस्वाद प्राप्त होता है, कहा भी है- वस्तु विचारत ध्यावतैं मन पावै विश्राम। रस स्वादत सुख ऊपजै अनुभव याको नाम।। इसी आत्मानुभव रूप अमृत…