03. बिम्ब ( मूर्ति ) परीक्षा प्रकरण!
बिम्ब परीक्षा प्रकरण द्वार गाथा— इअ गिहलक्खण भावं भणिय भणामित्थ बिंबपरिमाणं। गुणदोसलक्खणाइं सुहासुहं जेण जाणिज्जा१।।१।। प्रथम गृहलक्षण भाव को मैंने कहा। अब बिम्ब (प्रतिमा) के परिमाण को तथा इसके गुणदोष आदि लक्षणों को मैं (पेâरु) कहता हूँ कि जिससे शुभाशुभ जाना जाय।।१।। मूर्ति के स्वरूप में वस्तु स्थिति— छत्तत्तयउत्तारं भावकवोलाओ सवणनासाओ। सुहयं जिणचरणग्गे नवग्गहा जक्खजक्खिणिया।।२।।…