तीर्थंकर श्री ऋषभदेव चरितम् की हिन्दी टीका एवं कतिपय संस्कृत स्तुतियों का समीक्षात्मक अध्ययन
परम पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रथम आर्यिका शिष्या परम पूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिकारत्न श्री चंदनामती माताजी एक विदुषी आर्यिका और जिनशासन की उदीयमान नक्षत्र हैं | पूज्य माताजी से आगम ग्रंथों का तलस्पर्शी ज्ञान प्राप्त करके उन्होंने गुरुप्रेरणा से अनेकों लघु एवं वृहतकाय ग्रंथों की रचना की है जिसमें अनेक पूजन , भजन , विधान , संस्कृत – हिन्दी स्तुतियाँ , काव्य कथानक तथा टीका ग्रन्थ आदि शामिल हैं | वे एक उच्च कोटि की लेखिका और आशु कवियित्री हैं , प्रस्तुत आलेख में परम पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी दवारा भगवान ऋषभदेव के गुणानुवाद रूप संस्कृत भाषा में लिखे गए ग्रन्थ तीर्थंकर श्री ऋषभदेव चरितं पर चंदनामती माताजी दवारा लिखी गयी हिन्दी टीका , समयसार विधान तथा कुछ संस्कृत स्तुतियों का सार बताया गया है | ऐसी विदुषी आर्यिकरात्न को पाकर यह जिनशासन धन्य है , वे चिरकाल तक स्वस्थ और चिरायु रहकर जैनागम को ऐसे अमूल्य रत्न प्रदान करती रहें यही पवित्र भावना है |