आओ-आओ सब नर-नारी, गुरुभक्ती की बेला प्यारी।!
आओ आओ सब नर-नारी, गुरुभक्ति की बेला प्यारी … तर्ज-मैंने पायल है छनकाई………… आओ-आओ सब नर-नारी, गुरुभक्ती की बेला प्यारी। इनको वंदन है बारम्बार, हो माता-कर दो अब उद्धार, हो माता-कर दो अब उद्धार। मात चन्दनामती जी, जो कि प्रज्ञाश्रमणी हैं। इनकी लेखन शैली है, अती उत्तम-इनके……. इनके प्रवचन सुनकर सब जन, आनन्दित हो जाते…