नवग्रह शांति विधान : एक समीक्षा —पं वीरेन्द्र कुमार जैन, जैनदर्शनाचार्य जम्बूद्वीप हस्तिनापुर (मेरठ) मोहाशक्त प्राणी संसार से भयाकुलित रहता है, अनेक प्रकार की आकुलताओं से घिरा रहता है, परिजन-पुरजन, इष्ट संयोग आदि में सुखानुभूति करता है। असाताकर्म के मन्दोदय में, साता वेदनीय के उदय में अपने आप को पूर्णतः सुखी मानकर पूजापाठ आदि को,…
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परम पूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चन्दनामती माताजी द्वारा रचित विभिन्न नाट्य विविधता में एकता को संजोए इस भारतीय संस्कृति में संसारी प्राणी के उन्नयन एवं सही मार्गदर्शन हेतु सम्पूर्ण वस्तुस्थिति से अवगत कराते रोचक नाटकों का महत्त्व प्राचीनकाल से चला आ रहा है। आज भी भारत के कोने—में दशहरे के अवसर पर दश दिनों तक…
प्रज्ञाश्रमणी-आर्यिकारत्न-पूज्यश्री-चन्दनामती-मातृश्रिया विरचितं समीक्षक—प्रो., डॉ. भागचन्द्रो जैनो ‘भागेन्दु:’, दमोह, (म. प्र.) मूल-ग्रन्थस्य नाम, तस्य महत्त्वं रचयिता च— ‘मानतुंग’—महाचार्य:, विख्यात: जगतीतले। रचयामास स्तोत्रं, ‘भक्तामर’— मति श्रुतम्।।१।। नाना—संसिद्धि—संयुक्तं, महाकाव्योपमं हि तत्। ये पठन्ति मुदा लोके, कल्याणं वृणुते सदा।।२।। विधानस्य रचयित्री, तस्या: वैदुष्यं, वैशिष्ट्यञ्च— अतो संचिन्त्य माहात्म्यं, रचना—कर्म—विश्रुता। ‘र्आियकारत्न’—प्रख्याता, ‘गणिनी—मुख्यं—शिष्यका।।३।। दूरदृष्टित्व—सम्पन्ना, कुशला संघ—चालिका। आशु—कवियित्री माता, नैक—भाषा—विशारदा।।४।। वात्सल्यरत्ना विज्ञा, प्रज्ञा…
भगवान महावीर हिन्दी-अंग्रेजी जैन शब्दकोश समीक्षक—डॉ. सुशील जैन, मैनपुरी (वरिष्ठ विद्वान) २१ वीं शताब्दी के प्रारम्भ होते ही मोबाइल, इन्टरनेट व उस पर आधारित विभिन्न सामग्रियों का प्रयोग आज इतना बढ़ा कि उसके कारण पूरा विश्व बहुत छोटा सा लगने लगा है। एक समय था जब अंग्रेजी हटाओ आन्दोलन चला था पर इन सब वैज्ञानिक…