साधु परमेष्ठी पूजा(अट्ठाईस मूलगुण पूजा)!
साधु परमेष्ठी पूजा(अट्ठाईस मूलगुण पूजा) गीता छंद जो नग्न मुद्रा धारते, दिग्वस्त्रधारी मान्य हैं। निज मूलगुण उत्तरगुणों से, युक्त पूज्य प्रधान हैं।। सुर-असुर मुकुटों को झुकाकर, अर्चते हैं भाव से। मैं भी यहाँ आह्वान कर, पूजू उन्हें अति चाव से।।१।। ॐ ह्रीं श्रीसर्वसाधुपरमेष्ठिन्! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं। ॐ ह्रीं श्रीसर्वसाधुपरमेष्ठिन्! अत्र तिष्ठ…