स्थावर जीव संसारी जीव के दो भेद हैं-त्रस और स्थावर। एकेन्द्रिय जीव को स्थावर जीव कहते हैं। इन जीवों के केवल शरीर रूप एक स्पर्शन इन्द्रिय ही होती है। स्थावर जीव के पाँच भेद हैं– पृथ्वीकायिक, जलकायिक, अग्निकायिक, वायुकायिक और वनस्पतिकायिक। पृथ्वीकायिक जीव अर्थात् पृथ्वी ही जिनका शरीर हो, जैसे मिट्टी, पाषाण, अभ्रक, सोना आदि।…
श्रीमति सुनीता जैन श्रीमति सुनीता जैन कालेज आफ इंजीनियरिंग रुड़की की उपाध्यक्षा हैं । आपने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1973 में स्नातक एवं 1975 में ऑपरेशन रिसर्च जैसे नवोदित विषय में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की । शिक्षा के अभिभूत विकास में विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आपने कोर के विकास में प्रत्येक…
कुन्दकुन्द देव भव्यात्माओं! दिगम्बर जैन आम्नाय में श्री कुन्द्कुन्दाचार्य का नाम श्री गणधरदेव के पश्चात् लिया जाता है। अर्थात् गणधर देव के समान ही इनका आदर किया जाता है और इन्हें अत्यन्त प्रामाणिक माना जाता है। यथा- मंगलं भगवान वीरो, मंगलं गौतमो गणी।। मंगलं कुन्दकुंदाद्यो, जैनधमोऽस्तु मंगलम्।। यह मंगल श्लोक शास्त्र स्वाध्याय के प्रारंभ में…
मध्यलोक के जिनमंदिर (त्रिलोकसार से) इतः परं प्राप्तावसरं नरतिर्यग्लोकं निरूपयितुमनास्तावल्लोकद्वयस्थितजिनभवनस्तुतिपूर्वक तत्संख्यामाह— णमह णरलोयजिणघर चत्तारि सयाणि दोविहीणाणि। वावण्णं चउ चउरो णंदीसर वुंडले रुचगे१।।५६१।। नमत नरलोकजिनगृहाणि चत्वारि शतानि द्विविहीनानि। द्वापञ्चाशत् चत्वारि चत्वारि नन्दीश्वरे कुण्डले रुचके।।५६१।। णमह। नरलोके चतुःशतानि द्विविहीनानि ३९८ जिनगृहाणि नन्दीश्वरद्वीपे कुण्डलद्वीपे रुचकद्वीपे च तिर्यग्लोकसम्बन्धीनि यथासंख्यं द्वापञ्चाशज्जिनगृहाणि ५२ चत्वारि जिनगृहाणि ४ चत्वारि जिनगृहाणि ४ नमत।।५६१।।…
भगवान श्री मुनिसुव्रतनाथ जिनपूजा अथ स्थापना (नरेंद्र छंद) श्री मुनिसुव्रत तीर्थंकर के, चरण कमल शिर नाऊँ।व्रत संयम गुण शील प्राप्त हों, यही भावना भाऊँ।।मुनिगण महाव्रतों को पाकर, मुक्तिरमा को परणें।हम भी आह्वानन कर पूजें, पाप नशें इक क्षण में।।१।। ॐ ह्रीं श्रीमुनिसुव्रतनाथजिनेंद्र! अत्र अवतर अवतर संवौषट् आह्वाननं। ॐ ह्रीं श्रीमुनिसुव्रतनाथजिनेंद्र! अत्र तिष्ठ तिष्ठ ठ: ठ:…
शान्तिसागरमहाराज जन्मकाल और बाल्यावस्था गौरवशाली प्रकाशपुंज आचार्य कुन्दकुन्द,स्वामी समंतभद्र, विद्यानंदी, जिनसेन इत्यादि आचार्यों की जन्मभूमि तथा उपदेश से पवित्र कर्नाटक प्रदेश में आचार्यश्री १०८ शांतिसागर महाराज का जन्म हुआ। बेलगाँव जिले में भोज ग्राम के भीमगौंडा पाटील की धर्मपत्नी सत्यवती थीं। सन् १८७२ में आषाढ़ कृष्णा षष्ठी के दिन माता सत्यवती ने अपने पीहर…