क्षपक की मनोवैज्ञानिकता : सल्लेखना के सन्दर्भ में!
क्षपक की मनोवैज्ञानिकता सल्लेखना के सन्दर्भ में जीवन और मृत्यु का अनादि प्रवाह तब तक है, जब तक जीव की मुक्ति नहीं हो जाती। जो जीवन के सौन्दर्य व शित्व को पहचान लेते हैं, उनके लिए मृत्यु, मंगल महोत्सव बन जाती है। जैसे रात्रि में अरुणोदय होता है और अरुणोदय में ही रात्रि का निर्माण…