कुछ खास बातें /> left “50px”]] /> right “50px”]] /> left “50px”]] /> right “50px”]] रात को कपड़े बाहर न सुखाएं। बन्द घड़ियाँ घर में अशुभ होती है। झाडू पोंछा और कुड़ादान हमेशा छुपाकर रखें। रसोई घर में पानी और चूल्हा पास न रखें। मुख्य द्वार के सामने सीढ़ियाँ नहीं होनी चाहिए। पति पत्नी हमेशा…
संक्लेश का फल सुप्रभा– बहन कनकप्रभा ! आज स्वाध्याय करते हुए मैंने बहुत ही ह्रदयद्रावक एक कथा पढ़ी है,सो मैं तुम्हेँ सुनाती हूँ कनकप्रभा– हाँ बहन ! जरुर सुनाओं ! एतिहासिक घटनाओं को सुनने से ह्रदय पर बहुत ही अच्छा प्रभाव पड़ना है और मन सहसा पाप से भीरु हो उठता है सुप्रभा – जिस…
संस्कार संस्कार शब्द चमकना, कांतिसूचक अर्थ में है। वह बाहरी या शोभा का द्योतक है जिससे मनुष्य की रहनसहन, भावना बुद्धि, व्यक्तित्व समाज में दीप्तिमान हो उठे। जिस शिक्षा से मनुष्य का हित करने, एकता तथा सामंजस्य बनाने, दीन-दरिद्र, असहाय-अनाथ को यथायोग्य सब प्रकार का सहयोग करने के विचार उत्पन्न होते हैं। आध्यात्मिक गुणों का…
अरनाथ चक्रवर्ती इसी हस्तिनापुर नगरी में सोमवंश में उत्पन्न हुए राजा सुदर्शन राज्य करते थे। उनकी मित्रसेना नाम की रानी थी। रानी ने फाल्गुन कृष्णा तृतीया के दिन गर्भ में अहमिन्द्र के जीव को धारण किया, उसी समय देवों ने आकर गर्भकल्याणक महोत्सव मनाया। रात्री मित्रसेना ने नवमास के बाद मगसिर शुक्ल चतुर्दशी के दिन…
भावदेवभवदेवयो: पुनर्मनुष्यजन्मलाभ: संस्कृत भाषा में अथ भावदेवभवदेवचरदेवौ तृतीयस्वर्गस्य सप्तसागर- पर्यंतं आयु: समाप्तिमानीतवन्तौ। तन्मध्ये यदा षण्मासमायुरवशिष्टं तदानीं तत्र कल्पवृक्षस्य दीप्तिमंदतादिनानानिमित्तेन स्वर्गात्पतनं अवबुद्ध्य तौ शोकातुरौ संजातौ। तत्समये अन्ये देवादय आगत्य तौ समवबोधयन्। ततो धर्मबुद्ध्या उभौ अपि देवौ जिनमंदिरे गत्वा भावविशुद्ध्या जिनपूजां कृत्वातिष्ठतां अनंतरं अंतकालमासन्नं ज्ञात्वा कल्पवृक्षस्याध: उपविश्य समाहितमनसौ प्रतिमायोगं गृहीत्वा आत्मध्याने निमग्नौ अजायतां, महामंत्रं स्मारं स्मारं प्राणान्…
छोटी—छोटी बातें आसान बनाए काम /> left”50px”]] /> right”50px”]] १. शेविंग ब्रश पुराना हो जाने पर उसे ओवन—टोस्टर जैसी चीजों की सफाई में प्रयोग करें। २. गैस का स्लैव व रसोई का फर्श काम करने के बाद , अगर पानी में थोड़ा —सा सिरका मिलाकर पौछ दिया जाए तो चींटी व कीड़े नहीं आते। ३….
नीरस होती है ग्रंथी /> left”50px”]] /> right”50px”]] ग्रंथी अर्थात् गांठ । ग्रंथी को कहीं से भी कभी भी चखो, उसमें रस नहीं मिलेगा। वह नीरस ही लगेगी। यद्यपि इक्षु रस मधुर और सरस होता है। पर इक्षुखंड की गांठ रसहीन ही होती हैं। वैसी ही हैं राग—द्वेष की गांठे! कुटिलता—जटिलता की ग्रन्थियाँ । उसमें…
[[श्रेणी:जैन_महाभारत]] == (२) श्री वसुदेव वसुदेव का देशाटन— राजा समुद्रविजय ने अपने आठों भाइयों का विवाह कर दिया था, मात्र वसुदेव अविवाहित थे। कामदेव के रूप से सुन्दर वसुदेव बालक्रीड़ा से युक्त हो शौर्यपुर नगरी में इच्छानुसार क्रीड़ा किया करते थे। तब कुमार वसुदेव को देखने की इच्छा से नगर की स्त्रियों की बहुत बड़ी…
[[श्रेणी:कुन्दकुन्द_वाणी]] == श्रावक धर्म संकलनकर्त्री- गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी हिन्दी पद्यानुवादकर्त्री- आर्यिका चंदनामती चारित्र के दो भेद— जिणणाणदिट्ठिसुद्धं, पढमं सम्मत्तचरणचारित्तं। विदियं संजमचरणं, जिणणाणसदेसियं तं पि।।। (चारित्रपाहुड़ गाथा-५) शंभु छन्द— सम्यक्तवचरण चारित्र प्रथम, श्री जिनवर ने उपदेशा है। जो सम्यग्दर्शन और ज्ञान, से शुद्ध चरित निर्देशा है।। दूजा है संयमचरण चरित जो, सकल विकल द्वयरूप कहा।…