25. श्रावकों की त्रेपन क्रियायें श्रीकुन्दकुन्ददेव ने वर्णित की है।
श्रावकों की त्रेपन क्रियायें श्रीकुन्दकुन्ददेव ने वर्णित की है। गुणवयतवसमपडिमा, दाणं जलगालणं च अणत्थमियं। दंसणणाणचरित्तं किरिया तेवण्ण सावया भणिया।।१३७।। ८ मूलगुण, १२ व्रत, १२ तप, १ समता, ११ प्रतिमा, ४ प्रकार का दान, १ जलगालन, १ रात्रि भोजन त्याग, ३ दर्शन, ज्ञान और चारित्र इस प्रकार श्रावक की त्रेपन क्रियाएं हैं। ८ + १२ +…