स्वास्थ्य के दोहे जीवन में है स्वास्थ्य के तीन प्रमुख आयाम। पौष्टिक भोजन, संयमी और प्रतिदिन व्यायाम।। प्रात: जल सेवन करें, और दोपहर में छाछ । दूध गुनगुना रात्रि में व्याधि न आती पास।। हरी, बरी और करी है, शत्रु स्वास्थ्य के तीन। विजय मिले जो इन्द्रियों, को रखे निज आधीन।। खाद्य पेय कुछ भी…
आइये कुछ हटकर सोचें, और स्वयं निर्धारण करें, कि अगले भव में हम क्या बनना चाहते हैं संसारी जीव अनादिकाल से स्वयं के किये हुए कर्मों से बंधा है और अपने जीव के स्वभाव से अलग थलग हो, कर भ्रमण कर रहा है, स्वयं की अज्ञानता के कारण, और नही जानता कि वह कौन—कौन से…
परमात्मा की मूर्ति : श्रेष्ट आलंबन आराधना में आगे बढ़ने, उपासना में उज्ज्वल लाने, भक्ति में भव्यता का रंग प्रकट करने के लिए परमात्मा की मूर्ति एक सफल एवं पुष्ट आलंबन है। चक्षु व मन से एकाग्र होकर परमात्मा की मूर्ति को देखकर जो दिव्य भाव भक्ति का पवित्र स्त्रोत भक्त आत्मा में प्रवाहित होता…
कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ इंदौर एवं मध्यप्रदेश के जैन शास्त्र भण्डारों का सूचीकरण आचार्य कुन्दकुन्द द्विसहस्राब्दी महोत्सव वर्ष के पावन प्रसंग पर १८-१९ अक्टूबर १९८७ को इंदौर नगर में आयोजित जैन विद्या संगोष्ठी में समागत जैन विद्या मनीषियों के साथ विचार मंंथन से प्राप्त नवनीत के रूप में दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट के अंतर्गत एक शोध…
ग्वालियर क्षेत्र से विदित तीर्थंकर महावीर की प्रतिमाएं- एक प्रतिमाशास्तीय अध्ययन सारांश चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर की प्रतिमायें सम्पूर्ण देश में बहुलता से पायी जाती है किन्तु विभिन्न अंचलों में पायी जाने वाली प्रतिमाओं में प्राचीनता शिल्पकला आदि की दृष्टि से भिन्नता है। प्रस्तुत आलेख में ग्वालियर-चंबल संभाग, जिसके अन्तर्गत म.प्र. के ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर,…
जैन कर्म-सिद्धान्त और वंश परम्परा विज्ञान सारांश वंश परम्परा विज्ञान (उाहाूग्म् एम्गहम) की शाखा ण्त्दहग्हु द्वारा विभिन्न जीवधारियों की हूबहू प्रतिलिपि तैयार करने में वैज्ञानिकोें को मिली सफलता ने जैन कर्म सिद्धान्त के सम्मुख कुछ प्रश्नन उपस्थित किये हैं। प्रस्तुत आलेख में दोनों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करने के उपरान्त ज्वलंत प्रश्नों का तार्विक समाधान…
रात्रि भोजन निषेध – वैज्ञानिक एवं आरोग्य मूलक विश्लेषण सारांश श्रावक हो या साधु, दोनों को ही व्रतों की रक्षा के लिए अनस्तमित अर्थात् दिवा भोजन नामक व्रत का पालन करना आवश्यक है। त्याग पूर्वक व्रताचरण में जीवन व्यतीत करने वाला श्रावक ही बुद्धिमान है। रात्रि में भोजन करने वालों के अनिवार्य रूप से हिंसा…