शुक्लध्यान!
शुक्लध्यान जिस प्रकार अचल दीपक सघन अंधकार को शीघ्र ही नष्ट कर देता है, उसी प्रकार मुनि का सुनिश्चल धर्मध्यान भी कर्मकलंक के समूह को शीघ्र ही नष्ट कर देता है। जिनके आदि का संहनन है और जो वैराग्यपदवी को प्राप्त हुए हैं, ऐसे पुरुष ही अपने चित्त को शुक्ल- ध्यान करने में समर्थ ऐसा…