भाव पाप!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव पाप – Bhava Papa. Subjective vices or sins. मन से होने वाले ५ पाप या पाप रूप परिणाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव पाप – Bhava Papa. Subjective vices or sins. मन से होने वाले ५ पाप या पाप रूप परिणाम “
चित्रवाहन Name of the 10th Chakravarti (emperor) of future time. भावी शलाका पुरूष ; १०वें चक्रवर्ती का नाम ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्मिश्र – Sammishra. Mixed, an infraction of vow of limiting consumables & re-consumables i.e. eating of cooked food mixed with raw one etc. भोगोपभोग परिमाण व्रत का एक अतिचारः सचित्त से मिली हुई वस्तु को खाना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्मासन:A Posture of meditation, Specific sitting posture related to Yoga. ध्यान का आसन सीधे बैठकर बायां पैर दाहिनी जांघ पर व दाहिना पैर बांई जांघ पर रखकर बाएं हाथ की हथेली पर दाहिने हाथ की हथेली रखना ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथाख्यात विहार-शुद्धिसंयत–Yathakhyat Vihar–Shuddhi Sanyat. Those at the 11th, 12th, 13th or 14th stages of spiritual development. 11, 12, 13, 14वे गुणस्थान में पाये जाने वाले जीव यथाख्यात विहार शुद्धि संयत कहलाते है” अथवा जो यथाख्यात चारित्र वाले होते हुए शुद्धि प्राप्त संयत है”
चैत्यवंदना Reverential visits of temples with self-involvement. आत्माधीन होजकर जिनबिम्ब आदिकों की वंदना करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्त्यानगृद्वि कर्म प्रकृति – Styangraddhi Karma Prakrti. A karmic nature causing power of committing abnormal activity in the state of somnambulism.दर्शनावरण कर्म की उत्तर प्रकृतियो मे एक प्रकृति, जिसके निमित्त से स्वप्न अवस्था मे विशेष श़िक्त प्रकट होती है और जीव सोता हुआ भी भयानक असाधारण कार्य करता है उसे स्तयानगृद्वि निद्र कहते है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्म (देव) – Brahma (dev). A type of Kalpavasi deities. कल्पवासी देवों का एक भेद, ५ वें स्वर्ग के देव “
चकवा A large orange-brown duck, the Sheldrake, the significant symbol of Lord Sumatinath. सुमतिनाथ भगवान का चिन्ह।[[श्रेणी:शब्दकोष]]