प्रभाकर भट्ट!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभाकर भट्ट- आचार्य योगेन्दुदेव के षिश्य एक दिगम्बर साधु, जिनको सम्बोधित करते हुए इन्होने “परमात्मा प्रकाष” ग्रंथ की रचना की है। Prabhakarabhatta- A Digambar Jain saint, disciple of Yogendudeva Acharya
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभाकर भट्ट- आचार्य योगेन्दुदेव के षिश्य एक दिगम्बर साधु, जिनको सम्बोधित करते हुए इन्होने “परमात्मा प्रकाष” ग्रंथ की रचना की है। Prabhakarabhatta- A Digambar Jain saint, disciple of Yogendudeva Acharya
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहसा निक्षेप – Sahasaa Nikshepa. Sudden installation of something due to some fear etc. निक्षेपाधिकरण के 4 भेदों में एक भेद । यकायक किसी भय से या किसी अन्य कार्य करने की शीघ्रता से वस्तु को रख देना । यह अजीवाधिकरण आस्रव का एक कारण है।
उदयसेन Name of the disciple of ‘Acharya Gunsen-I’. गुणसेन प्रथम के शिष्य तथा नरेन्ट्रसेन के साधर्मी (ई.1098)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रयोग्य लब्धि- सम्यग्दर्षन की प्राप्ति में आधारभूत 5 उब्धियों में से चतुर्थ लब्धि, सर्व कर्मो की उत्कृश्ट स्थिति और उत्कृश्ट उनुभाग को घात करके अंतःकोड़ाकोडी स्थिति और द्विस्थानीय अनुभाग में स्थित कर देना। PrayogyaLabdhi- A type of attainment (Labdhi) before getting Samyakdarshan, experimental competency attainment
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशेष स्वभाव – Vishesha Svabhava. A particular nature of matters (like conscious-ness & unconsciousness etc.). स्वभाव के दो भेदों में एक भेद; चेतन, अचेतन, मर्त, अमर्त आदि १० स्वभाव द्रव्यों के विशेष स्वभाव हैं “
द्विदल Grains (pulse etc.) having two opposite faces alike are called non-edible when mixed with raw milk & curd (prepared from raw milk) etc. दो दल वाले धान्य आदि को कच्चे दूध या कच्चे दूध से निर्मित दही -छाछ के साथ मिलाने पर वह अभक्ष्य द्विदल कहलाता है। वर्तमान में कुछ लोग गर्म प्रासुक दूध…
ऊर्ध्वगुरूत्व Upward attractive force. किसी चीज को ऊपर की तरफ ले जाने की सामर्थ्य उर्ध्वगुरूत्व है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रातिक देव- एक प्रकार का व्यंतरजातीय देव। Pratika Deva- A type of peripatetic deities
द्विचरम देही Deities having two human births (last two life-courses) before getting salvation). जो देव अंतिम दो बार मनुष्य के भव लेकर निश्चित रूप से मोक्ष जाते हैं। वे द्विचरम देही कहलाते हैं।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]][[श्रेणी:पुत्र]] प्राणत – कल्प स्वर्गो में 14 वा कल्प ;स्वर्गद्ध Pranata- The 14th heaven