स्वचारित्र!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वचारित्र – Svacaaritra. Super right conduct.स्वरुपाचरण चारित्र अथवा वीतराग चारित्र का अपरनाम। 7वे गुणस्थान के अंत से इस चारित्र का प्रारम्भीकरण होता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वचारित्र – Svacaaritra. Super right conduct.स्वरुपाचरण चारित्र अथवा वीतराग चारित्र का अपरनाम। 7वे गुणस्थान के अंत से इस चारित्र का प्रारम्भीकरण होता है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्मासन:A Posture of meditation, Specific sitting posture related to Yoga. ध्यान का आसन सीधे बैठकर बायां पैर दाहिनी जांघ पर व दाहिना पैर बांई जांघ पर रखकर बाएं हाथ की हथेली पर दाहिने हाथ की हथेली रखना ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथाख्यात विहार-शुद्धिसंयत–Yathakhyat Vihar–Shuddhi Sanyat. Those at the 11th, 12th, 13th or 14th stages of spiritual development. 11, 12, 13, 14वे गुणस्थान में पाये जाने वाले जीव यथाख्यात विहार शुद्धि संयत कहलाते है” अथवा जो यथाख्यात चारित्र वाले होते हुए शुद्धि प्राप्त संयत है”
जयवान् Name of the 5th saint among 7 particular saints (Saptarishis). सप्तऋषियों में ५वें ऋषि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्याद्वादचंद्रिका टीका – Syaadvaadav Camdrikaa Tikaa.See- Niyamasaara Praabhrta.देखे- नियमसार प्राभृत।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्म (देव) – Brahma (dev). A type of Kalpavasi deities. कल्पवासी देवों का एक भेद, ५ वें स्वर्ग के देव “
जन्मसंस्कार क्रियामंत्र Rituals for birth ceremony. एक गर्भाधान क्रिया ‘जन्म संस्कार’ के मंत्र ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्यादनेक प्रदेषत्व – Syaadanekatva Pradessatva. A matter with different dispositions (in some aspect).भेद कल्पना सापेक्ष अशुद्व द्रव्यार्थिक नय की अपेक्षा से एक ही द्रव्य मे अनेक प्रदेषो की उपलब्धि होना। धर्म, अधर्म, आकाश और जीवद्रव्य के अनेक या नाना प्रदेश स्वभाव है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावि नैगमनय – Bhavi Naigamanaya. Wrong implication of something in present which is going to occure in future. एक नय; जो पदार्थ अभी अनिष्पन्न है,और भावि काल में निष्पन्न होने वाला है, उसे निष्पन्नवत कहना-अर्थात् जो बात आगे होगी उसको वर्तमान में कहना, जैसे अर्हत को सिध्द कहना “