स्वाद्य!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वाद्य – Svadya. Worth tasting, appetizing. आहार के 4 भेदो मे एक भेद। मुख का स्वाद बदलने के लिए खाने वाले लौग, इलायची आदि पदार्थ स्वाद्य कहलाते है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वाद्य – Svadya. Worth tasting, appetizing. आहार के 4 भेदो मे एक भेद। मुख का स्वाद बदलने के लिए खाने वाले लौग, इलायची आदि पदार्थ स्वाद्य कहलाते है।
देवताभास A false appearance of deities. देव का आभास देव न होते हुए भी देव जैसा लगना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांसारिक दुःख – Saansaarika Duhkha. Worldly affictions or troubles. लौकिक विषयों से उत्पन्न दुःख अर्थात् भोगसाधनात्मक भोगो का वियोग होने से जो दुःख उत्पन्न होता है। संसारी जीवों का इन्द्रिय सुख वासना जनित होने के कारण होने के कारण दुःखमय ही है क्योंकि आपत्त्किाल मे भोग व रोग चित्त मे उद्वेग करने वाले है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रथ – प्राचीन काल का प्रसिद्ध वाहन, इसमे हाथी घोडे जोते जाते थे। युद्ध के समय राजा इस पर आरूढ होकर समपरांगण मे जाते थे। वर्तमान में रथ पर भगवान विराजमान करके रथ यात्रा निकाली जाती है। Ratha-Chariot
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहायक कारण – Sahaayaka Kaarana. A helping cause. एक कारण । जो स्वयं कार्यरूप परिणाम वह उपादान कारण है तथा उसमें सहयक होने वाले पर द्रव्य व गुण निमित्त सहायक कारण है। इसे बलाधान या उदासीन निमित्त भी कहते है।
देवदर्शन Paying reverence to Lord- Arihant with proper procedure. जिनेन्द्र भगवान का विधिपूर्वक दर्शन करना, जिससे करोड़ों उपवास का फल प्राप्त होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पौराणिक राजवंश – Pauranika Rajavansha. Ancient dynasties like lkshvaku, Ugra, Kuru etc. इक्ष्वाकु वंश, उग्र्वंश, सुर्यवंश, कुंरुवंश, नाथवंश इत्यादि समस्त पौराणिक वंश कहलाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रध्वंसाभाव- 4 अभावों के भेदों में एक भेद; आगामी पर्याय में वर्तमान पर्याय का अभाव प्रध्वंसाभव है। जैसे-दही का घी में आभाव। pradhvamsabhava – a type of lacking, absence of present into future.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रसकर्म – मंत्र – तंत्र आदि के द्वारा रस आदि की सिद्धि करना। Rasakarma- Mystical activity
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेशघात- कर्मो का अपकर्शण या नश्ट होना। pradesaghata – destruction or karmas