मनःशुद्धि!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनःशुद्धि – Manahsuddhi. Mental purity. छल कपट आदि समस्त बुरे भावो से विरक्त होना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनःशुद्धि – Manahsuddhi. Mental purity. छल कपट आदि समस्त बुरे भावो से विरक्त होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थविर कल्पी – Sthavira Kalpii. One observing asceticism under the guidance of senior Acharya (saint).जो साधु एकलविहारी नही हो सकते है एवं स्थविर कल्प मे स्थिर रहते है वे स्थविर कल्पी कहलाते है। उत्तम संहनन वाला, परिषह विजयी, सिद्वान्त का ज्ञाता तपस्वी ही एकलविहारी अर्थात् जिनकल्पी होता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभंगदर्शन – Vibhamgadarsana. Apprehension of something with false clairvoy-ance. विभंगज्ञान के साथ होने वाला दर्शन “
चतुर्द्वीप India, Seediya, Baiktriya & Sariyana all four countries are togetherly called ‘Chaturdvip’. भारत की सीमा पर स्थित देश सीदिया , बैक्ट्रिया , सरियाना एवं भारत , चारों मिलकर चतुर्द्वीप कहलाते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रिभुवनकीर्ति Name of an Acharya and a Bhattarak. नन्दिसंघ बलात्कारगण शुभचन्द्र आम्नाय (वि. 1499-1538) सूरत गद्दी के एक भट्टारक , काष्ठा संघ के एक आचार्य। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव – Bhava. Volition, feeling, thought – activity, Nature of sen-tient and non-sentient matters. जीव के परिणाम, चेतन व अचेतन द्रव्यों के अनेकों स्वभाव “
चौंसठ ऋद्धिव्रत A type of vow (fasting) to be observed for different 64 days related to 64 supernatural powers of great saints. महामुनियों के चौंसठ ऋद्धियों की अपेक्षा ६४ व्रत किए जाते हैं . इनके मंत्र पूजा एवं विधि को ‘व्रतविधि एवं पूजा’ भाग २ पुस्तक से देखना चाहिए समुच्चय मंत्र – ॐ ह्रीं चतुःषष्टिऋद्धिभ्यो…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्तिमितसागर – Stimitasaagara. Name of the third son of king Andhakvishni.राजा अन्धकवृष्णि एवं रानी सुभद्रा का तीसरा पुत्र।
देवसेन An Acharya, disciple of Veersen (Dhavalåkar).आचार्य ई. 820-870 मं वीरसेन (धवलाकार) के शिष्य महाधवल सिद्धांत 40,000 श्लोक के कर्ता। [[श्रेणी: शब्दकोष ]] या Father’s name of the 5th Teerthankar (Jaina-Lord) of Videh kshetra (region). विदेह क्षेत्र में स्थित 5 वें तीर्थंकर के पिता का नाम। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]