बहुविध!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुविध- मतिज्ञान का एक भेद; बहुत प्रकार के अलग-अलग पदार्थो का ज्ञान होना। Bahuvidha- A type of sensory knowledge pertaining to many objects
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुविध- मतिज्ञान का एक भेद; बहुत प्रकार के अलग-अलग पदार्थो का ज्ञान होना। Bahuvidha- A type of sensory knowledge pertaining to many objects
उपरिमग्रैवेयक An upper most spatial region of a Graiveyaks. 9 गैवेयक में ऊपर के 3 सुमनस, सोमनस, प्रीतिंकर विमान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संख्या – Sankhyaa. Numbers or meaningful numbers, One of the eight Anuyogdvars (disquisition doors). गिनती, सत् प्ररूपणा में जो पदार्थों का अस्तित्व कहा गया है, उनके प्रमाण का वर्णन करने वाली संख्या हैं ” जीवादि पदार्थों के भेदों की गणना, यह 8 अनुयोग द्वारों में दूसरा अनुयोग द्वार है “
आनुपूर्वी नामकर्म प्रकृति A type of Karmic nature causing same shape of the soul-points of beings as the shape of their previous birth. जिसके उदय से विग्रहगति में आत्म प्रदेशों का आकार पिछले (छोडे़ हुए) शरीर के आकार का हो।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उपपत्ति Evolution, Origination, Demonstration. आविर्भाव कारण हेतु प्राप्ति।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधोत्सरण- उत्कर्षण; स्थिति बंध को बढाकर एक एक अन्ततर्मुहुर्त तक समान बंध करना। Bandhotsarana- Bond progression
उपकल्कि Rebellious kings who act against religion. अवसर्पिणी के पंचम काल में प्रत्येक एक हजार वर्ष के बाद एक-एक कल्की तथा 500 वर्ष के बाद एक-एक उपकल्की जन्म लेता है ये धर्मद्रोही राजा होते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दण्डरत्न One of the 14 jewels of Chakravarti. 14 रत्नों में एक रत्न चक्रवर्ती का एक निर्जीव रत्न । यह सेना के आगे चलता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रेस्य प्रयोग- देषव्रत का एक अतिचार; मर्यादा के बाहर सेवक को भेजकर काम कराना। Presya prayoga- A type of violation, to do something out of limit
उन्मुख Raising the face, Looking upwards, Name of 9th Narad (a sage) of present era. चेहरा उठाना ऊपर देखना नवम नारद-इनकी आयु कृष्ण के बराबर एक हजार वर्ष की थी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]