इंद्रिय संयम!
इंद्रिय संयम Self restraint, desistance from sensual pleasure. पाँचों इन्द्रिय और मन को नियंन्त्रित कर अपने आधीन रखना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
इंद्रिय संयम Self restraint, desistance from sensual pleasure. पाँचों इन्द्रिय और मन को नियंन्त्रित कर अपने आधीन रखना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आप्तमीमांसा टीका A book (Ashtashati Bhashya) written by ‘Acharya Akalank Dev’. देवागम स्तोत्र पर आचार्य अकलंक देव कृत एक संस्कृत टीका जिसका नाम अष्टशती भाष्य है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आलेखित Written displayed or Intuitional illustration. चित्रित लिखा हुआ ध्यान में स्थिरता के पुरिपुष्ट हो जाने पर ध्येय का सवरूप ध्येय के सन्निकट न होते हुए भी स्पष्ट रूप से प्रतिभासित होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
देवागम स्तोत्र A religious hymn written by Acharya Samant- bhadra. आचार्य समन्तभद्र द्वारा रचित एक स्तोत्र । अपरनाम-आप्तमीमांसा।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संबंध – Sanbandha. Alliance, Relation, Connection. संयोग, मिलाप, साहचर्य ” जहां पर अभेद प्रधान और भेद गौण होता है वहां पर संबंध समझना चाहिए “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूल क्रिया–Mula Kriya. Fundamental operations or activities. प्रधान आवश्यक कर्म”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रिति – Shriti. Dependence, support, approach, Multiplicative increase in virtues. अवलम्ब, सहारा, पहुंच ” सम्यग्दर्शन आदि शुद्ध गुणों की गुणित रूप उत्तरोत्तर उन्नत अवस्था को प्राप्त कर लेना यह भाव श्रिति है, एवं सोपान पंक्तिक्रम से चढना यह द्रव्य श्रिति है ” भक्त प्रत्याख्यान सल्लेखना विधि के 40 अधिकारों में 9वां अधिकार, शुभ परिणामो…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेघंकरा–Meghankara. A female divinity of the summit of Sumeru mountain. सुमेरु पर्वत के कूट की दिक्कुमारी देवी”
उद्वेग Anxiety, Restlessness. इष्ट के वियोग में विह्वल भाव या घबराहट का भाव होना अर्थात् चिन्ता खेद विसमय आदि का होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभंग ज्ञान – Vibhamga Jnana. Faise clairvoyance. मिथ्या अवधिज्ञान “