लोकालोक व्यापी!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकालोक व्यापी – Lokaaloka Vyaapi. Supremely pervaded knowledge-omniscience. केवलज्ञान जो समस्त लोकालोक को जानता है अर्थात् सर्वगत है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकालोक व्यापी – Lokaaloka Vyaapi. Supremely pervaded knowledge-omniscience. केवलज्ञान जो समस्त लोकालोक को जानता है अर्थात् सर्वगत है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्वेद – Nirveda. Datachment, Aversion from the worldly affairs. सब अभिलाषाओंका त्याग निर्वेद कहलाता है-संसार, शरीर, भोगों से वैराग्य भाव “
द्वारवंग A place, present Darbhanga district. वर्तमान दरभंगा जिला। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आश्रम Four stages of human life. गुरुकुल एंव बह्मचर्य गृहस्थ वानप्रस्थ और सन्यास ये चार आश्रम कहलाते हैं अथवा जहाँ विशुद्ध ज्ञान व दर्शन की प्रधानता हो।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बेलन – Belana. Cylindrical substance, a roller. रोटी , पूरी बेलने का उपकरण “
आर्यनंदि Disciple of ‘Acharya Chandrasen’ and spiritual guide of Veersen ji. पंचस्तूप संघ की पट्टावली के अनुसार चंद्रासेन के शिष्य तथा वीरसेन (धवलाकार) के गुरू थे (ई.767-798)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आलयांग A type of wish fulfilling trees (heavenly) providing divinely palaces. कल्पवृक्ष का एक भेद-जो रमणीय दिव्य भवनों को दिया करते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्विकल्प समाधि – Nirvikalpa Samaadhi. Absolute meditation, the state of indeterminate ecstasy. समस्त विकल्पों से रहित परम समाधि को प्राप्त होना “
दंड समुद्घात Expansion of spaces of soul in term of 14 Rajju. केवली के समुद्घात करने का प्रथम चरण, केवली भगवान की आयु कर्म की स्थिति वेदनीय , नाम, गोत्र के बराबर करने के लिए आत्मा के प्रदेश वातवलय को छोड़कर दण्डरूप से 14 राजू तक फैल जाते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आर्यमंक्षु Name of a great Acharya saint. दिगम्बर आम्नाय में आपका स्थान आचार्य पुष्पदन्त तथा भूतबली के समकक्ष है। आचार्य गुणधर से आगत पेज्ज दोसपाहुड़ के ज्ञान को आचार्य परम्परा द्वारा प्राप्त करके आपने तथा नागहस्ति ने यतिवृषभाचार्य को दिया था।[[श्रेणी:शब्दकोष]]